संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/ढांड। जिलेभर में मंगलवार को मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस उपलक्ष्य में विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई जगहों पर भंडारे का भी आयोजन हुआ।
इसी कड़ी में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के टीक परिसर में मकर संक्रांति पर्व पर हवन किया गया। हवन का आयोजन विशेष रूप से विश्वविद्यालय की उन्नति, समृद्धि और कल्याण के लिए किया गया। मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है। इस पवित्र अवसर पर यज्ञ के दौरान सभी प्राध्यापकों ने विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वित्ताधिकारी कृष्ण कुमार मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहे और यज्ञ ब्रह्मा के रूप में डॉ. हरीश कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी ने भगवान से विश्व शांति की प्रार्थना भी की। उपस्थित सभी लोगों ने इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में प्रतिभागिता करके भगवान को आहुतियां प्रदान की और इसके माध्यम से सभी के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
उधर, श्री कपिल मुनि तीर्थ एवं देव सुधार सभा कौल की ओर से मकर संक्रांति पर कपिल मुनि तीर्थ पर हवन एवं भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य यजमान के तौर पर जिला परिषद अध्यक्ष कर्मबीर कौल ने शिरकत की। साधवी वेद प्रियानंद देवी के मंत्रोच्चार के साथ यजमान व ग्रामीणों ने हवन में आहुतियां डालीं और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर मकर संक्रांति के महत्व के पर प्रकाश डालते हुए आचार्य अभिषेक ने कहा कि इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। इसमें अन्न, तिल, गुड़, कपड़े, कंबल और धन का दान करना चाहिए। इन सब चीजों का दान करने से पुण्य मिलता है।
उन्होंने कहा कि काले तिल का दान करने से सूर्य देव और शनि देव की कृपा होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। कर्मबीर कौल ने आस्था और श्रद्धा का प्रतीक कपिल मुनि तीर्थ कौल का इतिहास कितना पुराना है,इसका अनुमान लगाना संभव नही है।
उन्होंने कहा कि इस स्थल पर कपिल मुनि ने अपनी माता को सांख्या शास्त्र का बोध करवाया था। तब से इस स्थल को कपिल मुनि तीर्थ के नाम से जाना जाता है। जहां मकर संक्रांति के दिन हर वर्ष हवन एवं भंडारा आयोजित किया जाता है। इस अवसर प्रधान रामपाल फौजी, नरेश आढ़ती, गुलाब पूर्व सरपंच कौल, राजेंद्र पंच, कर्मबीर, ईश्वर, समुद्र मौजूद रहे।
दान और पूजा-अर्चना कर पुण्य किया अर्जित
सीवन। मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने दान और पूजा-अर्चना कर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य में तिल, गुड़, कपड़े और अनाज का वितरण किया। कई लोगों ने गोशालाओं में जाकर गायों को चारा खिलाया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ, जहां भक्तों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी श्रद्धा प्रकट की।
.कई जगहों पर जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करने के कार्य भी बड़े स्तर पर किए गए। कई स्थानों पर सामूहिक भंडारों में प्रसाद वितरण किया गया और लड्डू, खिचड़ी, गजक जैसे पकवान बांटे गए। श्रद्धालुओं ने परिवार और मित्रों के साथ इस पर्व को प्रेम और सौहार्द के साथ मनाया। संत छविराम दास ने कहा कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का यह समय हमारे जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लाने का प्रतीक है। दान-पुण्य और सेवा का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में समानता लाने का संदेश देता है।
इस अवसर पर समाजसेवी विवेक गोयल, कंवल संदूजा, विपिन मुंजाल, पूर्ण सैनी, सुरेंद्र सरदाना, अशोक गोयल,
सुभाष गर्ग, महावीर मंगला, कार्तिक
सरदाना सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संवाद