कृषि विभाग में कार्यरत सुभाष चहल ने कहा कि किसान मशीनों के माध्यम से पराली के बंडल बनाकर इसे खेत से निकाल सकते हैं। पराली का पशु चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। किसान को बस एक बार पराली प्रबंधन को लेकर शुरुआत करने की जरूरत है। किसान पराली के बंडल बनाकर बिजली उत्पादन प्लांट, गत्ता फैक्टरी में बेच कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
कृषि विभाग में कार्यरत अजय कुमार ने बताया कि धान की कटाई होने को है, इसके बावजूद कई किसान अंधाधुंध कीटनाशकों का छिडक़ाव खेत में कर रहे हैं। इससे खर्चा अधिक होने के साथ ही स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। किसान खेतों में जैविक खाद का अधिक इस्तेमाल करें।
किसान ईश्वर ने कहा कि वह पिछले चार वर्षों से लगातार पराली का प्रबंधन कर रहे है। फसल अवशेष मिट्टी में मिलाने से हर वर्ष उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। वहीं प्रबंधन करने पर सरकार की ओर से भी एक हजार रुपये प्रति एकड़ मिलता है।
वातावरण रहा है साफ सुथरा
किसान छितर ने कहा कि पराली प्रबंधन करने से किसानों को बहुत लाभ है। फसल का उत्पादन अच्छा होता है और वातावरण साफ सुथरा रहता है। पराली को मशीनों से प्रबंधन करने पर खेत समय पर खाली हो जाते है, इसके बाद समय पर गेहूं की बिजाई कर सकते हैं।
किसान कर रहे पराली प्रबंधन
पूर्व सरपंच चरण सिंह ने बताया कि गांव के किसान पराली प्रबंधन को लेकर जागरूक हैं। कोई भी किसान पराली में आग नहीं लगाता। बल्कि उसका मशीनों के साथ बंडल बनवाकर सरकार की ओर से एक हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन लें रहे हैं और वातावरण को साफ सुथरा बनाने में सहयोग कर रहे हैं।
आज के समय में किसान हैं जागरूक
किसान राजेंद्र कुमार ने कहा कि आज के समय में किसान जागरूक हो चुका है। कोई एकाध किसान ही पराली में आग लगाता है, अन्यथा सभी किसान पराली का प्रबंधन करते हैं। उन्होंने किसानों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला के कार्यक्रम की सराहना की।