संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। साहित्य सभा कैथल की ओर से महिला दिवस पर आरकेएसडी कॉलेज कैथल में काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के कई साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, नारी-शक्ति, संवेदनशीलता और जीवन के विभिन्न पहलुओं को अभिव्यक्त किया।
साहित्य सभा के सदस्य डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि महिला दिवस पर आयोजित गोष्ठी में प्रिया शर्मा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कमलेश शर्मा ने कहा, “जम चुकी है मन की झील, अब उसमें भावों के हंस नहीं तैरते।” उनकी इन पंक्तियों पर श्रोताओं ने तालियों से उत्साहवर्धन किया। नारी के विभिन्न रूपों को नमन करते हुए प्रिया शर्मा ने कहा, “हे स्त्री नमन है तेरे हर रूप को, तेरे हर स्वरूप को। श्रृंगार करना तुम अपना संस्कारों से, संघर्ष के अंगारों से।”
दुनिया के तौर-तरीकों पर अपनी बात रखते हुए दिनेश शर्मा ‘दानिश’ ने कहा, “दुनिया का ढंग दुनिया जैसा होता है, जो होता है अच्छा होता है।” गृहस्थ जीवन की जटिलताओं का चित्रण करते हुए यात्री गंगा ने कहा, “कहे खांडे की धार गृहस्थी, पड़ता सर कटवाणा, थोड़ा सुलझे ज्यादा उलझे, गृहस्थी वाला बाणा।” सामाजिक परिवर्तन में नारी की भूमिका को रेखांकित करते हुए रिसाल जांगड़ा ने कहा, “तोड़ी घर के बंधन की जंजीर नारी नै, उठाई इंकलाब की शमशीर नारी नै।”
सतीश शर्मा माजरा ने कहा, “बेटी कर रही पुकार, मुझे कोख में मत मार, मुझे भी दे जीने का अधिकार।” वहीं डॉ. अशोक कुमार ने कहा, “कड़वा है पर यही सच है, खुदा नहीं है ये भी सच है।”अनिल गर्ग धनौरी ने हास्य के रंग में कहा, “आजकाल की लुगाइयाँ नै कुछ कह दें तो ले ज्यां सै अफारा, कत्ती देर ना लगाती, डायल कर देवैं सै एक सौ बारां।”नारी शक्ति के आधुनिक स्वरूप को दर्शाते हुए सतबीर सिंह जागलान ने कहा, “आदमी गेलै मिलाकै कंधा, काम करैं सै सारे, आत्मरक्षा सीख कै दुश्मन पै पड़री भारी।” इसके अलावा अनिल कौशिक, श्याम सुंदर शर्मा गौड़, डॉ. विकास आनंद, सुरेश कुमार कल्याण ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।