पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा की ओर से लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद डीसी सुजान सिंह ने मामले में संज्ञान लिया है। साथ ही जांच के लिए कमेटी गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है। जांच जिला परिषद के सीइओ को सौंपी है और भूमि संरक्षण अधिकारी को भी जांच टीम में शामिल किया गया है। दूसरी ओर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में एकबार फिर विभिन्न कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और इसमें एक मंत्री की संलिप्तता भी बताई है।
रामपाल माजरा ने वीरवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में करोड़ों के घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि कलायत और राजौंद ब्लॉक में रिचार्ज बोर लगवाए जाने से पहले ही दो करोड़ से अधिक का बिल प्रस्तुत कर एक मंत्री के इशारे पर घोटाला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व नालों की सफाई व तालाबों की खुदाई के नाम पर 15 से 20 करोड़ का घोटाला किया जा चुका है। यह सब घोटाले सरपंचों से चार्ज वापस लिए जाने के बाद किए गए हैं। जिन तालाबों की खुदाई सिंचाई विभाग की ओर से पौंड अथॉरिटी या फिर मनरेगा के तहत करवा दी गई थी, उन्हीं तालाबों को ब्लॉक समिति व जिला परिषद के माध्यम से खुदा हुआ बताकर करोड़ों रुपये हड़प लिए गए। यही नहीं कोरोना काल में कैलरम, भालंग, बालू, सेरहधा, जाखौली, सिनण, रेहड़ा, नंदकरण माजरा, संतोख माजरा व खेड़ी संदल जैसे दर्जनों गांवों में सफाई के नाम पर लाखों के फर्जी बिल बनाए गए। इस संबंध में शुक्रवार को पत्रकारवार्ता के दौरान रामपाल माजरा ने कहा कि बीडीपीओ इस समय पंचायतों के प्रशासक हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कि कौन उन पर ऐसे बिल प्रस्तुत करने के लिए दबाव डाल रहा है। उन्होंने इसके लिए एक मंत्री को जिम्मेदार ठहराया। चेतावनी दी कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो वे सभी दस्तावेजों के साथ सीएम से मिलेंगे और अगर जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर इस मामले में डीसी सुजान सिंह ने जांच कमेटी गठित कर संबंधित बीडीपीओ को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है और तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।