स्कूल से भूखे लौट रहे हैं मासूम
698 स्कूलों में 80 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा मिड डे मील, स्कूलों की रसाइयों पर लगे हैं ताले
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जितेंद्र पांचाल
कैथल। स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र हुए एक महीने से भी ज्यादा समय हो चुका है। कोरोना का प्रभाव कम होने के चलते विद्यार्थियों की कक्षाएं भी ऑफलाइन लगाई जा रही हैं। जहां बच्चों को अभी तक पुस्तकें नहीं मिली हैं। वहीं दोपहर के भोजन के लिए भी मासूम बच्चे इंतजार में हैं। उन्हें इंतजार इस बात है कि कब सप्ताह में हर रोज अलग-अलग व्यंजन उन्हें स्कूल में खाने को मिलेंगे।
शिक्षा विभाग की ओर से करीब एक सप्ताह पहले स्कूलों में मिड डे मील के तहत विद्यार्थियों के लिए दोपहर का भोजन बनाने के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसी स्कूल में मिड डे मील बनना शुरू नहीं हुआ है। रसोई घरों पर ताले लगे हैं। भोजन बनाने के लिए फंड उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कक्षाओं में आने वाले विद्यार्थियों को भूखे वापस लौटना पड़ रहा है।
स्थिति ये है कि स्कूलों में बनीं रसोइयों पर दरवाजों पर ताले जड़े हैं। पड़ताल में पता चला कि मार्च माह में मिला राशन तो बच्चों को सूखा बांट दिया गया, लेकिन अप्रैल माह का राशन अभी तक स्कूलों में पहुंचा ही नहीं है। विभाग ने बीते सप्ताह से स्कूलों में खाना पकाने के आदेश तो दिए हैं, लेकिन अध्यापकों का कहना है कि जब स्कूलों को राशन या राशि ही नहीं मिली है तो वे कहां से बच्चों को खाना खिलाएं? अगर राशन आता है तो दोपहर का भोजन बनाना शुरू किया जाएगा।
जिले के 698 स्कूलों में 80 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा मिड डे मील-जिले के 698 स्कूलों में इस समय कक्षा प्रथम से आठवीं तक 80 हजार के करीब विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस बार मिड डे मील की फंड ही इन स्कूलों में नहीं पहुंचा है। इन स्कूलों में 1423 महिलाएं कुक का कार्य कर रहीं हैं। इन्हें खाना बनाने पर प्रतिमाह 3500 रुपये मानदेय मिलता है। स्थिति ये है कि इन महिलाओं का मानदेय तक स्कूलों के पास नहीं पहुंचा है। फिलहाल ये भी स्पष्ट नहीं है कि स्कूलों में फंड कब तक पहुंचेगा।
आठवीं कक्षा तक दिया जाता है मिड डे मील-सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक मिड डे मील दिया जाता है। जिसमें पूरे सप्ताह दिन के हिसाब से मीनू निर्धारित है। चपाती, दलिया, चावल से लेकर सप्ताह के सभी दिनों के लिए अलग-अलग व्यंजन बनाए जाते हैं। प्रति विद्यार्थी की दर से भोजन तैयार करने का खर्च विभाग द्वारा उपलब्ध करवाया जाता है। बच्चे अब नए सत्र में स्कूल आने लगे हैं। उन्हें इंतजार है कि स्कूल में कब दोपहर का भोजन शुरू होगा।
तकनीकी कारणों से बनी है दिक्कत, जल्द शुरू होगा भोजन बनना
जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि स्कूलों के खातों में तकनीकी बदलाव करने की प्रक्रिया जारी है। इस कारण फंड स्कूलों में नहीं पहुंच पाया है। विभाग की ओर से जल्द ही राशन या राशि स्कूलों में पहुंचा दी जाएगी। इसके साथ ही दोपहर का भोजन बनाने का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।