संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद सर्जरी बंद होने का सीधा असर अब राजकीय अस्पताल की नेत्र ओपीडी पर दिख रहा है। जिला नागरिक अस्पताल स्थित नेत्र विभाग में प्रतिदिन लगभग 350 मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या 250 से 300 तक रहती थी। इनमें से 15-20 मरीज मोतियाबिंद की शिकायत लेकर आ रहे हैं।
निजी अस्पतालों में योजना का लाभ न मिलने के कारण सरकारी अस्पताल के नेत्र चिकित्सक कक्ष के बाहर सुबह से दोपहर तक लंबी कतारें लग रही हैं। मरीजों में आंखों में जलन, धुंधलापन, पानी आना, एलर्जी और मोतियाबिंद जैसी समस्याएँ अधिक देखने को मिल रही हैं। युवा भी आंखों में जलन और एलर्जी की शिकायत लेकर चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में आंखों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है, ऐसे में विशेष देखभाल जरूरी है।
नेत्र सर्जन डॉ. कविता गर्ग ने बताया कि आंखों का लाल होना और पानी आना भी नेत्र विकार के संकेत हैं। ऐसे में चश्मे का उपयोग करना चाहिए और धूल-मिट्टी से एलर्जी वाले लोग चिकित्सक की सलाह पर ही दवा लें।नेत्र ओपीडी में हुआ कार्य
सफेद मोतिया सर्जरी
286
आयुष्मान के तहत सर्जरी
185
नेत्रदान
10 आई बॉल
बच्चों को दिए चश्मे
216
बुजुर्गों को दिए चश्मे
6,345
(आंकड़ा: 1 अप्रैल से 31 अक्तूबर 2025 तक)
राजकीय नेत्र अस्पताल में आंखों में जलन, मोतियाबिंद, पानी आना जैसी समस्याओं के मरीज आ रहे हैं। आयुष्मान योजना के तहत प्रतिदिन अस्पताल में मोतियाबिंद के निशुल्क ऑपरेशन किए जा रहे हैं। किसी भी प्रकार की नेत्र समस्या होने पर मर्जी से ड्रॉप न डालें और नजदीकी चिकित्सक से ही परामर्श लें। -डॉ. विकास धवन, उप-सिविल सर्जन, कैथल