संवाद न्यूज़ एजेंसी
ढांड। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) की ओर से खरीफ सीजन 2025-26 के लिए 14 फसलों के लिए घोषित एमएसपी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए बढ़ोतरी को ऊंट के मुंह में जीरा बताया है।
संगठन के जिला अध्यक्ष कामरेड राजकुमार सारसा व जिला सचिव कामरेड कृष्ण चंद ने ढांड स्थित कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सीसीईए द्वारा घोषित एमएसपी स्वामीनाथन आयोग की सी2+50प्रतिशत की सिफारिश पर आधारित नहीं है।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार धान के लिए सी 2 जमा 50 प्रतिशत दर 3135 रुपये प्रति क्विंटल बनती है। सीसीईए द्वारा घोषित धान का एमएसपी 2369 रुपये प्रति क्विंटल है, जो 766 रुपये प्रति क्विंटल कम है। उन्होंने कहा कि भारत में धान का औसत उत्पादन 25-30 क्विंटल प्रति एकड़ है और एक एकड़ उत्पादन पर किसान का होने वाला नुकसान 19150 रुपये से 22980 रुपये के बीच होगा। इसी तरह अन्य फसलों के लिए भी घोषित एमएससी सी 2 जमा 50 प्रतिशत दर से कम है। उन्होंने कहा कि
संगठन और देश भर के अन्य किसान संगठन लगातार प्रधानमंत्री से मांग कर रहे हैं कि वे 2014 के आम चुनाव में भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वायदे के अनुसार गारंटीकृत खरीद के साथ एमएसपी सी 2+50 प्रतिशत लागू करें।
लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार 12वें साल भी सी2+50 प्रतिशत की दर से एमएसपी न बढ़ाकर पूरे भारत के किसानों को धोखा दे रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जो गंभीर कृषि संकट और किसान की आत्महत्या का कारण बनता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मोदी राज में भारत में हर दिन 31 किसान आत्महत्या कर रहे हैं।