संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कैथल रोडवेज बसों का बेड़ा लगातार घटता जा रहा है, जबकि यात्रियों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। पिछले एक साल में डिपो को नई 38 बसें मिली हैं, लेकिन इस दौरान 48 बसें जर्जर हो गईं। इस वजह से यात्रियों और विभाग दोनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
जिले की आबादी के अनुसार डिपो में कुल 250 बसों का बेड़ा होना चाहिए, लेकिन फिलहाल डिपो में 192 बसें ही उपलब्ध हैं, जिसमें से 23 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत शामिल हैं। इनमें से केवल 169 बसें नियमित रूट पर चल रही हैं, जबकि बाकी की स्थिति जर्जर है। डिपो को अभी 58 बसों की आवश्यकता है।
बसों की कमी के कारण यात्रियों को समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पाने की समस्या आती है, जिससे समय की बर्बादी होती है। यात्रियों ने रोडवेज विभाग से नई बसों की खरीद की मांग की है, ताकि यात्रा के दौरान कोई असुविधा न हो।
वर्तमान में कैथल डिपो से रोजाना 192 में से लगभग 180 बसें रूट पर चल रही हैं, जबकि 12 बसें मरम्मत के कारण बाहर रहती हैं।
रोडवेज डिपो में बसों की कमी के कारण दिल्ली, जींद, करनाल, असंध, कुरुक्षेत्र समेत दर्जनभर गांवों के रूटों पर दोपहर बाद यात्रियों को बसें नहीं मिलने से बस स्टैंड पर लंबा इंतजार करना पड़ता है। शाम के समय 7 बजे के बाद भी कई रूटों पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यात्री बोले- नई बसों की खरीद जरूरी
यात्री रामकिशन, मंजीत और मनोज ने बताया कि पुरानी बसें जर्जर होने के कारण नई बसों की खरीद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जर्जर बसों को हटाने के साथ नई बसों का टेंडर जारी होना चाहिए। रात के समय बसें समय पर न मिलने से यात्रियों को निजी वाहनों में अतिरिक्त खर्च कर गंतव्य तक जाना पड़ता है।
डिपो में 192 बसें हैं और यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जा रही है। नई बसों के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है और जल्द नई बसें आने की उम्मीद है। -अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर