संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। सिनेमा रोड स्थित विश्वकर्मा मंदिर चीका में नौ दिवसीय श्री राम कथा के सातवें दिन सीता हरण के प्रसंग का वर्णन किया। इस मौके पर प्रयागराज से पधारे कथावाचक नारायण प्रसाद द्विवेदी महाराज ने कहा कि राजा की प्रजा दुखी है तो वो राजा भी दुखी है। राजा सोया रहेगा तो प्रजा जागेगी नहीं।
उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि जब जटायु नासिक के पंचवटी में रहते थे। तब एक दिन आखेट के समय महाराज दशरथ से उनकी मुलाकात हुई और तभी से वे और दशरथ मित्र बन गए। वनवास के समय जब भगवान श्रीराम पंचवटी में पर्णकुटी बनाकर रहने लगे, तब पहली बार जटायु से उनका परिचय हुआ। भगवान श्रीराम अपने पिता के मित्र जटायु का सम्मान अपने पिता के समान ही करते थे। रावण जब सीताजी का हरण कर लेकर गया, तब सीताजी का विलाप सुनकर जटायु ने रावण को रोकने का प्रयास किया, लेकिन अंत में रावण ने तलवार से उनके पंख काट डाले।
जटायु मरणासन्न होकर भूमि पर गिर पड़े और रावण सीताजी को लेकर लंका की ओर चला गया। सीता की खोज करते हुए राम जब रास्ते से गुजर रहे थे तो उन्हें घायल अवस्था में जटायु मिले। जटायु मरणासन्न थे। जटायु ने राम को पूरी कहानी सुनाई और यह भी बताया कि रावण किस दिशा में गया है। जटायु के मरने के बाद राम ने उसका वहीं अंतिम संस्कार और पिंडदान किया। कितनी बड़ी बात है एक गिद्ध जो मांसाहारी है, वो भारत का वीर है जो रावण जैसी ताकत के सामने छाती ठोक कर खड़ा हो गया।
उन्होंने कहा कि ऐसे वीरों का देश है ये भारत देश। इसके बाद भगवान राम ने मां सबरी के झूठे बेर का भोग लगाया। पं. नारायण प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि विश्वनाथ विश्व कवि हैं, वाल्मीकि वसुंधरा कवि, तुलसी सियाराम कवि और दिनकर राष्ट्र कवि हैं। केवल राम पर विश्वास करो। साहित्य सखा और मित्र हैं।