जिले में हैपेटाइटस-सी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो सालों में यह कई गुणा बढ़ गया है। यदि इसी तरह से यह रोग बढ़ता गया तो जिले में यह मर्ज लाइलाज हो जाएगा। पिछले दो सालों में स्वास्थ्य विभाग से रेफर होने वाले मरीजों की संख्या 600 को पार कर गई है। वहीं सामान्य वर्ग के ऐसे सैकड़ों मरीज हैं। जो अपने स्तर पर इलाज करवा रहे हैं।
राजौंद ब्लॉक में फैला है हैपेटाइटस सी
राजौंर ब्लॉक में राजौंद सहित आसपास के गांवों रोहेड़ा, बीरबांगड़ा सहित ब्लॉक के अधिकतर गांवों में यह बीमारी फैली हुई है। जिसमें लोग धीरे-धीरे बढ़ी समस्या की ओर बढ़ रहे हैं। राजौंद निवासी राजेश कुमार, दुर्गादत्त, संजय ने बताया कि यहां लगभग हर घर में एक या दो लोगों को हैपेटाइटस-सी की बीमारी है। जिसका इलाज काफी महंगा है। इस बीमारी के कारण कई लोग लाखों रुपये गंवा कर भी इलाज नहीं करवा पाए। इलाज महंगा होने के कारण यह बीच में ही छूट जाता है। सामान्य वर्ग में तो करीब 5000 रुपये प्रति टीके के हिसाब से खर्च करना पड़ता है। एक व्यक्ति को 25 से लेकर 36 तक टीके लगवाने पड़ते हैं। हालांकि पीजीआई रोहतक में यह दर 4300 रुपये प्रति टीका निर्धारित की गई है।
कैथल के आसपास के गांवों में भी पहुंच चुकी है बीमारी
राजौंद ब्लॉक के साथ-साथ कैथल ब्लॉक में भी इस बीमारी ने पांव पसारना शुरु कर दिए हैं। गांव देवीगढ़ के अलावा शहर में भी कई हिस्सों में हैपेटाइटस-सी के रोगी सामने आ रहे हैं।
पीजीआई रोहतक में करवाया जा रहा है विभाग द्वारा इलाज
इस बीमारी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पीजीआई रोहतक को नोडल अस्पताल बनाया है। जहां रेफर होकर पहुंचने वाले मरीजों में अनुसूचित जाति व बीपीएल के लिए निशुल्क टीके लगाए जाते हैं। वहीं सामान्य वर्ग में 4300 रुपये प्रति टीका की दर निर्धारित की गई है। इस बीमारी से पीड़ित कृष्ण कुमार, राजेश कुमार, विजय ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि इस बीमारी से पीड़ित सामान्य वर्ग के लिए भी योजना स्वीकृत की जाए। उन्हें भी निशुल्क इलाज दिया जाए।
ये हैं कारण
हैपेटाइटस-सी फैलने के मुख्य कारणों में इन क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा संक्रमित सूई का प्रयोग करने, ड्रग एडिक्टों द्वारा एक ही सिरिंज से नशा करने, नाई की दुकानों पर संक्रमित ब्लेड से शेव करवाने एवं असुरक्षित यौन संबंधों के कारण भी यह रोग फैलता है।
लक्षण
इसमें मुख्यत: पीलिया होने के बाद कमजोरी आ जाती है। बुखार भी हो जाता है। सामान्यत: इस बीमारी के लक्षण नजर नहीं आते। टेस्ट करवाने पर ही इसकी जानकारी मिलती है। धीरे-धीरे यह बीमारी शरीर को कमजोर बना देती है। जिस कारण कई अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं।
जिला अस्पताल में हैपेटाइटस-सी की रोकथाम के लिए को-ओर्डिनेटर डा. अनिल अग्रवाल ने बताया कि दो सालों में जिला अस्पताल से रेफर होने वाले मरीजों की संख्या 600 के पार कर गई है। बीमारी के लगातार केस सामने आ रहे हैं। सामान्य वर्ग के लिए कोई स्कीम अभी तक नहीं है।
यह बीमारी जिले में लगातार बढ़ रही है। इसकी रोकथाम के लिए विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पिछले दो सालों में राजौंद सहित कैथल ब्लॉक में काफी संख्या में मरीज सामने आए हैं। लोगों को चाहिए कि इस बीमारी से बचाव के लिए सावधानी बरतें।
शमशेर सिंह, जिला एपिडोमोलॉजिस्ट (महाहारी अधिकारी)
कैथल व करनाल में हैपेटाइटस-सी की काफी रिपोर्टिंग है। इस बीमारी के लिए सरकार ने एस सी व बीपीएल वर्ग के लिए योजना स्वीकृत की है। सामान्य वर्ग को कंट्रोल रेट पर टीके लगाए जाते हैं। लोगों को इससे बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
डा. वंदना भाटिया, सीएमओ, कैथल।