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Kaithal News: जर्जर एंबुलेंस के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं, जिले में 18 में से आठ एंबुलेंस ने पार किए मानक

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जिला नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। संवाद - फोटो : सांकेतिक
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कैथल। जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं इन दिनों पुरानी और जर्जर श्रेणी में पहुंच चुकी एंबुलेंस के सहारे चल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में मौजूद 18 एंबुलेंस में से आठ निर्धारित मानकों के अनुसार जर्जर होने की सीमा पार कर चुकी हैं। इसके बावजूद नई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से इन्हीं वाहनों से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम लिया जा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार किसी एंबुलेंस की अधिकतम आयु पांच वर्ष या तीन लाख किलोमीटर तय है। जिले में पहले 21 एंबुलेंस थीं जिनमें से तीन को पहले ही जर्जा घोषित किया जा चुका है। शेष 18 एंबुलेंस में भी आठ निर्धारित मानक को पार कर चुकी हैं। हालांकि तकनीकी रूप से चलने की स्थिति में और विभाग के पास एंबुलेंस का टोटा होने के कारण उनको चलाया जा रहा है जबकि विभाग को कम से कम 22 से 25 एंबुलेंस की जरूरत है।
कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना एंबुलेंस के ही
स्वास्थ्य विभाग के पास मौजूद 18 एंबुलेंस के बेड़े में से 6 जिला नागरिक अस्पताल, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 6 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद हैं जबकि जिले में 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। ऐसे में 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जिनके पास एंबुलेंस की सुविधा ही नहीं है। जबकि एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 30 हजार से ज्यादा आबादी का बोझ है।
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हर दिन कई कॉल, संसाधन सीमित
जिले में एंबुलेंस सेवा पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। प्रतिदिन औसतन 40 से 50 मरीजों के लिए कॉल आती हैं, जबकि कई बार एक साथ पांच से 10 और कुछ दिनों में 60 से 70 तक कॉल दर्ज हो जाती हैं। ऐसे में सीमित एंबुलेंस होने के कारण मरीजों और परिजनों को इंतजार करना पड़ता है। उसके अलावा पुरानी हो चुकी एंबुलेंस बार बार खराब पड़ रही हैं और इनकी मरम्मत में लगने वाले समय के कारण भी कई बार मरीजों को इंतजार करना पड़ता है।
2021 के बाद एंबुलेंस ही नहीं मिली
स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में 2018, 2019 और 2021 मॉडल की एंबुलेंस शामिल हैं। पुरानी एंबुलेंस में तकनीकी खराबी आने की घटनाएं बढ़ रही हैं जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर नई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गईं तो भविष्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर और अधिक दबाव पड़ सकता है। विभाग ने अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा है। प्रदेश स्तर पर 200 नई बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एंबुलेंस खरीदने की प्रक्रिया चल रही है जिनमें से जिले को पांच-छह एंबुलेंस मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सीएम 1 जुलाई को नारायणगढ़ से 70 एएलएस एंबुलेंस को भी हरी झंडी दिखा चुके हैं और इनमें से भी जल्द ही जिले को दो नई एंबुलेंस मिल सकती हैं।
विभाग के पास एक भी एडवांस एंबुलेंस नहीं
जिले में जो 18 एंबुलेंस हैं और उनमें से एक भी एएलएस यानी एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस नहीं है। इनमें से दो बीएलएस यानी बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को ही विभाग ने एएलएस में कन्वर्ट करवाया हुआ है।

क्या होती है बीएलएस एंबुलेंस
बेसिक लाइफ सपोर्ट यानी बीएलएस एंबुलेंस उन मरीजों के लिए होती है, जिनकी स्थिति स्थिर होती है और जिन्हें अस्पताल पहुंचाने के दौरान प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत होती है। इनमें ऑक्सीजन सिलिंडर, स्ट्रेचर, फर्स्ट-एड किट, ब्लड प्रेशर व पल्स ऑक्सीमीटर जैसे बुनियादी उपकरण व प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन होते हैं।
क्या होती है एएलएस एंबुलेंस
एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट यानी एएलएस एंबुलेंस गंभीर और जीवन-रक्षक उपचार की जरूरत वाले मरीजों के लिए होती है। इसमें बीएलएस की सभी सुविधाओं के साथ उन्नत चिकित्सा उपकरण और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहता है। इनमें वेंटिलेटर, कार्डियक मॉनिटर/ईसीजी, डिफिब्रिलेटर, उन्नत एयरवे मैनेजमेंट उपकरण, आपातकालीन दवाएं और आईवी सपोर्ट के साथ ही प्रशिक्षित पैरामेडिक/चिकित्सकीय स्टाफ होता है।
मरीजों की संख्या बढ़ने से पहले की तुलना में एंबुलेंस की जरूरत है। विभाग पहले ही एंबुलेंस की मांग भेज चुका है और उम्मीद है कि जल्द ही दो से तीन एडवांस एंबुलेंस विभाग को मिल जाएंगी। उसके अलावा भी मुख्याल्य की ओर से ही बड़े स्तर पर बीएलएस एंबुलेंस खरीदने के लिए भी प्रक्रिया चली हुई और तब भी जिले को एंबुलेंस मिलेंगी।
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- डाॅ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।

जिला नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। संवाद- फोटो : सांकेतिक

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