संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। कुपोषण मुक्त अभियान के तहत भूना गांव को चिह्नित किया गया है। इसके तहत वीरवार को गांव में समुदाय आधारित कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग की गई, जिसमें वजन और ऊंचाई को मापा गया।
सुपरवाइजर दीप्ति ने महिलाओं की बैठक में फल-सब्जी व आहार के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी गुरजीत कौर ने बताया कि गांव को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए वीरवार को भूना गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर लगाया गया। आशा कार्यकर्ता और एएनएम के साथ बच्चों की माता के साथ-साथ पोषण स्थिति पर चर्चा की।
वहीं, मौसम के अनुसार आहार के लिए प्रेरणा दी। पोषण युक्त जैसे प्रोटिन में कैल्शियम की अधिकता वाला आहार, सोयाबीन, दूध दही सभी सही मात्रा में बच्चों को आहार में शामिल करवाई जाए तथा खेलकूद के माध्यम से बच्चों की ऊंचाई को बढ़ाने पर प्रेरणा दी गई। उन्होंने बताया कि भूना गांव में स्थित छह आंगनबाड़ी केंद्रो में से तीन आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का वजन, लंबाई की जांच डॉक्टर की टीम के साथ मिलकर सुपरवाइजर दीप्ति ने लिया गया।
आंगनबाड़ी वर्कर्स की ओर से गांव के शून्य माह से छह साल तक के बच्चों का वेट हाइट पोषण ट्रैकर एप पर भरा जाता है, जिससे बच्चों के माता-पिता को भी अपने बच्चों की सही पोषण स्थिति का पता चल जाता है। सरकार का लक्ष्य कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें बेहतर पोषण उपलब्ध कराना है। माता को बच्चों की डाइट में इन पोषक तत्वों के महत्व को समझने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा और सरकार का यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होगा। यह योजना न ही केवल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाएगा, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों को भी अधिक प्रभावी बनाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास आने वाले समय में बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने का कार्य करेगा। बच्चों की शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही माइक्रोन्यूट्रिएंट पोषक तत्व को बच्चों के खाद्य सामग्री में समावेश किया गया है। इस कार्यक्रम के दौरान मौके पर सुपरवाइजर दीप्ति, स्वास्थ्य विभाग से एएनएम सुनीता, डॉ. हितेश, डॉ. शालिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, हेल्पर, आशा कार्यकर्ता आदि
मौजूद रहे।