संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में लिंगानुपात सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। इसी क्रम में पाबला गांव में विभाग की ओर से एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को लिंगानुपात और पीएनडीटी एक्ट से जुड़ी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर एसएमओ डॉ. श्यामसुंदर ने महिलाओं को “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो बेटियों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बना सकता है।
डॉ. श्यामसुंदर ने कहा कि अगर लड़कियां शिक्षित होंगी तो दो परिवारों का भला करेंगी। हर बेटी समाज के विकास की आधारशिला है। डीसी प्रीति ने कहा कि समिति को उन गांवों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जहां लिंगानुपात औसत से कम है या पिछले वर्षों की तुलना में गिरावट आई है। ऐसे क्षेत्रों में गिरावट के कारणों की पहचान कर ठोस रणनीति तैयार की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि कन्या भ्रूण हत्या गंभीर अपराध है और इसे रोकने के लिए किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि अक्तूबर में जिले में 1,000 लड़कों के मुकाबले 927 लड़कियों ने जन्म लिया था। जाखौली गांव ने सर्वाधिक लिंगानुपात दर्ज कर पहला स्थान हासिल किया है, साल 2024 के आंकड़ों के अनुसार, जाखौली में 44 लड़कों के मुकाबले 68 लड़कियों, कैलरम में 43 लड़कों के मुकाबले 62 लड़कियों ने जन्म लिया है।
लिंगानुपात सुधार के लिए प्रशासन की सख्त निगरानी
लिंगानुपात की स्थिति सुधारने को लेकर उपायुक्त प्रीति की अध्यक्षता में हाल ही में लघु सचिवालय सभागार में जिला स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि पीएनडीटी, एमटीपी और एआरटी अधिनियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
जिले के अल्ट्रासाउंड, एमटीपी और आईवीएफ केंद्रों की नियमित जांच व निगरानी की जाए। साथ ही “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत आंगनबाड़ी वर्कर और आशा वर्कर को सक्रिय रूप से जोड़ा जाए।उन्होंने कहा कि यदि किसी को लिंग जांच या अवैध गर्भपात की जानकारी मिलती है, तो वह तुरंत पुलिस या स्वास्थ्य विभाग को सूचित करे। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा। -प्रीति, उपायुक्त