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Kaithal News: खुद के पास सरकारी नौकरी नहीं पर शागिर्दों को दिलाई सफलता

Fri, 21 Mar 2025 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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राजिंद्र तंवर
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कैथल। पाई गांव के कोच शमशेर सिंह शेरी खुद सरकारी नौकरी नहीं करते लेकिन उनसे प्रशिक्षण लेकर सैकड़ों कबड्डी खिलाड़ियों ने सफलता की इबारत लिखी है। विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतने के साथ उन्होंने सरकारी नौकरी भी हासिल की है।

कबड्डी एनआईएस कोच शमशेर सिंह शेरी का जन्म एक मई 1965 को हुआ था। उन्होंने सैकड़ों खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर हजारों पदक दिलवाए हैं। इतना ही नहीं बेहतरीन खेल की बदौलत सरकारी नौकरी भी प्राप्त की है।
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गौरतलब है कि पाई गांव को कबड्डी का हब कहा जाता है। यहां महिला और पुरुष खिलाड़ी दोनों ने कोच शमशेर सिंह शेरी से प्रशिक्षण लेकर अपनी पहचान बना रहे हैं।  वर्ष 1990-91 में एनआईएस कोचिंग डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने अपने गांव पाई के स्टेडियम में कबड्डी कोचिंग शुरू की। शुरुआती दिनों में 150 पुरुष खिलाड़ी उनके निर्देशन में अभ्यास करते थे। कोच शमशेर सिंह ने सुबह और शाम कई घंटे मेहनत कर खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया।

प्रमुख खिलाड़ी और उपलब्धियां ः उनके शिष्य बलवान सिंह को 10 अगस्त 1993 को हरियाणा के राज्यपाल से भीम अवार्ड से सम्मानित किया गया। वर्ष 1999 में उनके दो शिष्य, सुरेश कुमार और भारत, भारतीय टीम में शामिल हुए थे। प्रशिक्षण का असर था कि उनके शागिर्दों ने सर्कल कबड्डी प्रतियोगिता में पाकिस्तान को हराकर भारतीय टीम को विजय दिलाई थी।

वर्तमान में सुरेश कुमार हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर हैं और भारत रोडवेज विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में 70 से अधिक खिलाड़ी रेलवे, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत हैं।

महिला कबड्डी सेंटर की स्थापना

वर्ष 2006 में उन्होंने सीनियर कोच स्व. राजबीर सिंह पाला के साथ मिलकर पाई गांव के कन्या स्कूल में महिला कबड्डी सेंटर शुरू किया। इस सेंटर में जूनियर, सब-जूनियर और सीनियर वर्ग की 150 लड़कियां अभ्यास करती हैं। हाल ही में पूजा नरवाल ढुल ने ईरान के तेहरान में छठी एशियाई महिला कबड्डी चैंपियनशिप प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।

सरकारी नौकरी न मिल पाने का अफसोस ः शमशेर सिंह ने कहा कि एनआईएस डिप्लोमा, डीपीएड, एमपीएड और कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया का ऑफिशिएट डिप्लोमा करने के बावजूद उनका सरकारी सेवा में चयन नहीं हुआ। इसका उन्हें अफसोस है। संवाद
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समर्पण, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है जीवन
कोच शमशेर सिंह शेरी का जीवन समर्पण, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उनकी कोचिंग में प्रशिक्षित खिलाड़ी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। उनके प्रयास का नतीजा है कि पाई गांव का भारतीय कबड्डी के इतिहास में एक अहम स्थान रखता है। उन्होंने एमए फिजिकल एजुकेशन कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर से की। उनके गुरु कोच सतबीर सिंह ढुल, ईक्कस गांव, जींद और मार्गदर्शक स्व. राजबीर सिंह पाला रहे हैं। कोच शमशेर सिंह खुद भी एक कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं और दो बार ऑल इंडिया स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उनके किसानी परिवार में पांच भाई और पांच बहनें हैं। उनकी चार बेटियां और एक बेटा भी खेल से जुड़े हुए हैं।
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