संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। दुसेरपुर गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गांव का एकमात्र सरकारी ट्यूबवेल पिछले डेढ़ वर्ष से रेत और मिट्टी युक्त पानी आपूर्ति कर रहा था, लेकिन अब यह ट्यूबवेल पूरी तरह ठप हो चुका है। इस चिलचिलाती गर्मी में जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, उस समय गांव में इंसानों और पशुओं दोनों के लिए पेयजल का संकट खड़ा हो गया है।
पूर्व सरपंच नरेश शर्मा, रामफल मेहला, कूड़ा राम, महेंद्र सिंह, नारायणदत्त शर्मा, बाबू राम व धर्मपाल आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए केवल एक ही सरकारी ट्यूबवेल है। यह ट्यूबवेल लंबे समय से खराब स्थिति में था और लगातार रेत व मिट्टी के साथ पानी आपूर्ति कर रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, विभागीय कर्मचारी गड्ढे में बार-बार रेत भर कर अस्थायी समाधान करते रहे, लेकिन नया ट्यूबवेल लगाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जबकि इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें की गई थीं।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में गांव में ना तो इंसानों के लिए पीने का पानी है और ना ही पशुओं के लिए। गर्मी के मौसम में स्थिति और विकराल हो गई है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
एसडीओ और जेई ने गांव का दौरा कर ट्यूबवेल का किया निरीक्षण
ट्यूबवेल के पूरी तरह ठप होने के बाद विभाग भी हरकत में आ गया है। एक दिन पहले विभाग के एसडीओ और जेई ने गांव का दौरा कर ट्यूबवेल का निरीक्षण किया और उसे कंडम घोषित कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि नया ट्यूबवेल लगाने के लिए पहले ही एस्टीमेट बनाकर मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। तत्काल समाधान के तौर पर विभाग गांव के आसपास किसी निजी ट्यूबवेल से अस्थायी रूप से पेयजल आपूर्ति जोड़ने की तैयारी में है, ताकि गांववासियों को आवश्यक मात्रा में पानी उपलब्ध करवाया जा सके।