राजौंद। दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य पंडित राम भगत हरित ने बताया कि गोवर्धन पूजा गऊ की पूजा है और भगवान श्री कृष्ण ने इसे विशेष महत्व दिया।
भगवान कृष्ण के समय से पहले इस दिन इंद्रदेव की पूजा होती थी, लेकिन श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान कृष्ण ने गाय की पूजा को विशेष स्थान दिया। हिंदू ग्रंथों के अनुसार, गाय का दूध अमृत के समान माना जाता है और गर्भावस्था में गाय का दूध पिलाने से संतान के बौद्धिक विकास को बल मिलता है। हरित ने बताया कि गोवर्धन पूजा में गऊ के गोबर से गोवर्धन तैयार किया जाता है और इसे पूर्व-पश्चिम की दिशा में स्थापित कर पूजा की जाती है। दक्षिण दिशा की ओर देवता के पैर या मुख करना अनुचित माना जाता है।
पर्व के दौरान लोग गन्ना, कपास, लाठी, मदानी आदि सामग्री का उपयोग कर गोवर्धन पर सजावट करते हैं। इस तैयारी में खेत में हरी भरी फसल और घर में दूध-दही सहित सुख-समृद्धि के प्रतीक दृश्य बनाए जाते हैं। इस तरह श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन की पूजा कर परिवार और घर की समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं।