कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉॅ.रमेश वर्मा
कलायत। किसान मिट्टी और पानी की जांच के आधार पर ही संतुलित खादों का इस्तेमाल करें ताकि आने वाली खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सके। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने किसानों का आह्वान किया की आने खरीफ सीजन से पहले किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच अवश्य करवाए और मिट्टी जांच के आधार पर ही संतुलित खादों का उपयोग करें। खेत की मिट्टी में जिन पोषक तत्वों की कमी है उन्हीं का उपयोग करके किसान कृषि फसलों के उत्पादन को बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि किसान अपने खेतों में अंधाधुंध खादों का प्रयोग से बचें ऐसा करने से किसान की आर्थिक हानि के साथ साथ मृदा का स्वास्थ्य भी खराब होता है। केवीके के मृदा वैज्ञानिक डाॅ.दीपक कुमार ने बताया की किसान धान की फसल से अपने खेतों में मूंग व ढैंचा की बिजाई करें। इससे किसान को अतिरिक्त आय होने के साथ साथ खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी। उन्होंने बताया की ढैंचा की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु होता है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में जमा करता है। ढैंचा के अवशेष मिट्टी में मिलने से कार्बनिक पदार्थों में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है। हरी खाद के रूप में ढैंचा मृदा की संरचना में सुधार करता है और खेत में खरपतवारों के नियंत्रण करने में प्रभावी भूमिका निबाहता है। इसी तरह से मूंग की फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से यूरिया व डीएपी की खपत में 30 से 35 प्रतिशत की बचत की जा सकती है। डाॅ.रमेश वर्मा ने अपने खेतों में मूंग व ढैंचा की फसल बोने के लिए प्रेरित करने के लिए सरकार की अनेक स्कीमें हैं जिनका लाभ किसान को मिलेगा। उन्होंने किसानों से आह्वान किया की अपने खेत में मूंग व ढैंचा की फसल बोने से पूर्व किसान पोर्टल पर पंजीकरण अवश्य करवा लें। ताकि किसानों को सरकार सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता मिल सके। संवाद