संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिलेभर में शनिवार से 10 दिवसीय गणेश महोत्सव का शुभारंभ हुआ। सर्राफा बाजार समेत जिले में 50 से अधिक जगहों पर महोत्सव बनाने के लिए पंडाल सजाए गए हैं। गणेश चतुर्थी महोत्सव 17 सितंबर तक आयोजित होगा। प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ गणेश महोत्सव का समापन होगा।
शहर के सर्राफा बाजार, तलाई बाजार, सदर बाजार सहित अन्य जगहों पर भगवान गणपति की प्रतिमा के साथ पंडाल लगाए गए हैं। 10 दिनों तक यहां पूजा-अर्चना भक्त करेंगे। इसके बाद विभिन्न नहरों में बप्पा का विसर्जन किया जाएगा। गणपति महोत्सव को लेकर शहर के बाजारों में भी खरीदारी हो रही है।
पिछले 28 साल से शहर के सर्राफा बाजार में यह महोत्सव मनाया जा रहा है। गणपति सेवा मंडल सर्राफा बाजार मंडल के प्रधान राकेश वर्मा उर्फ रिंकू ने बताया कि शनिवार से गणपति महोत्सव शुरू हुआ है। रोजाना गणपति की पूजा-अर्चना की जाएगी। 13 सितंबर को बाबा श्याम का जागरण मंडल की तरफ से करवाया जाएगा। 15 सितंबर को भंडारा लगाया जाएगा। 17 सितंबर को भगवान गणपति का विसर्जन होगा।
उन्होंने बताया कि इस दिन शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद गांव काकौत के नजदीक सिरसा ब्रांच नहर में विसर्जन होगा। इसमें मंडल सदस्यों के साथ-साथ शहरवासी बढ़ी संख्या में भाग लें। रिेंकू वर्मा ने बताया कि भगवान गणपति की पूजा-अर्चना के साथ-साथ दोनों समय में आरती होगी। प्रसाद भी भक्तों को वितरित किया जाएगा।
इस अवसर पर भगवान दास, विक्की वर्मा, राजेश वर्मा, रोहित सिंगला, राजू वर्मा, राजन वर्मा एवं मंडल के सभी सदस्य मौजूद रहे।
कलायत में आयोजनों की धूम
कलायत। गणेश चतुर्थी पर नगर में अनेक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए। विधि विधान से भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की गई।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि शिवपुराण के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश जी का अवतरण हुआ था। सनातन परंपरा में भगवान गणेश जी को विध्नहर्ता और रिद्धि-सिद्धि के दाता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
उन्होंने बताया कि भगवान गणेश की कृपा से परिवार पर आने वाले सभी संकट और विघ्न दूर हो जाते हैं। उनके आशीर्वाद से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि दस दिनों तक गणपति भगवान की पूजा के बाद उनका विसर्जन होगा। चतुर्थी के दिन गणेश उपनिषद जैसे धार्मिक ग्रंथों से वैदिक भजनों के जाप के बीच मूर्तियों का लाल चंदन के लेप और पीले और लाल फूलों से अभिषेक किया गया।
उन्होंने बताया कि गणेश महोत्सव के समापन पर, मूर्तियों को ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीत और नृत्य के साथ विशाल जुलूसों में स्थानीय नदियों तक ले जाया जाता है। जहां उन्हें विसर्जित किया जाता है, जो गणेश की कैलाश पर्वत की ओर घर वापसी की यात्रा का प्रतीक है।