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प्रायश्चित ही मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय : आचार्य संतोष

Sun, 08 Sep 2024 03:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भी जारी रही। कथाव्यास आचार्य संतोष कृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते हैं। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया।

जीवन में सत्संग और शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। भागवत कथा के दौरान कपिल चरित्र, सती चरित्र, धु्रव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान के नाम मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार उतर जाता है।
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भक्त प्रहलाद प्रसंग सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि उन्होंने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था। इसके सुनने मात्र से भक्त प्रहलाद के कई कष्ट दूर हो गए थे। भगवान नृसिंह रूप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी हैं। उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी से प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राण बचाए।
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उन्होंने कहा कि बच्चों को जो धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है वह जीवन भर उसका ही स्मरण करते हैं। ऐसे में बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान दिया जाना चाहिए। कथा व्यास ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं वहां आपका अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों हो। भजन मंडली की ओर से प्रस्तुत किए गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर हो गए।
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