संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिड-डे मील योजना के तहत फरवरी माह में प्रतिदिन अलग-अलग पौष्टिक व्यंजन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए शिक्षा निदेशालय द्वारा भोजन का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है। यह आहार कक्षा बालवाटिका से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मिलेगा। मोटे अनाज (मिलेट) से दाल-चावल तक... रोजाना बच्चों को पौष्टिक भोजन परोसा जाएगा।
शेड्यूल के अनुसार फरवरी माह के 28 दिनों में से 24 दिन विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जाएगा, जबकि चार दिन स्कूलों में अवकाश रहेगा। मिड-डे मील योजना के अंतर्गत हर महीने बच्चों को अलग-अलग प्रकार का संतुलित, पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य न केवल स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना है, बल्कि उनके शारीरिक व मानसिक विकास के लिए आवश्यक पोषण सुनिश्चित करना भी है।
राजमा-चावल, कढ़ी-पकौड़ा जैसे बच्चों के पसंदीदा व्यंजनों के साथ मिलेट्स पराठा और गेहूं-रागी का पूड़ा भी मेन्यू का हिस्सा हैं। मिड-डे मील शेड्यूल में पौष्टिक मिलेट परांठा व दही के साथ-साथ दाल-चावल, मूंग-मसूर की दाल, मिस्सी रोटी एवं सब्जी, मीठे मूंगफली चावल, पौष्टिक नमकीन दलिया, गेहूं-रागी का पेड़ा सहित कई प्रकार के पोषक व्यंजन शामिल किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील की गुणवत्ता और स्वच्छता पर सख्त निर्देश दिए हैं।
ये रहेगा मिड-डे मील का शेड्यूल
तिथि
भोजन
8 रविवार
अवकाश
9 सोमवार
पौष्टिक सोया खिचड़ी
10 मंगलवार
मीठा दलिया
11 बुधवार
चावल व सफेद चना
12 वीरवार
पौष्टिक चना दाल खिचड़ी
13 शुक्रवार
पौष्टिक मिस्सी परांठा
14 शनिवार
अवकाश
15 रविवार
अवकाश
16 सोमवार
दाल-चावल
17 मंगलवार
रोटी के साथ मूंग-मसूर की दाल
18 बुधवार
मिस्सी रोटी एवं सब्जी
19 वीरवार
मीठे मूंगफली चावल
20 शुक्रवार
पौष्टिक नमकीन दलिया
21 शनिवार
गेहूं-रागी का पेड़ा
22 रविवार
अवकाश
23 सोमवार
सब्जी पुलाव व काला चना
24 मंगलवार
रोटी के साथ घीया-चना दाल की सब्जी
25 बुधवार
राजमा-चावल
26 वीरवार
कढ़ी-पकौड़ा व चावल
27 शुक्रवार गुड़ रोटी व दही
28 शनिवार
पौष्टिक मिलेट परांठा व दही
वर्जन
जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष कुमार ने बताया कि मुख्यालय के निर्देशानुसार सभी सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील उपलब्ध कराया जा रहा है। यह भोजन बालवाटिका से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच स्कूल स्टाफ द्वारा की जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की कमी को समय रहते दूर किया जा सके।