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सुरक्षित वाहन पॉलिसी का करें पालन : उपायुक्त

Thu, 15 May 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। लघु सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में बुधवार को उपायुक्त डीसी प्रीति ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर निजी स्कूल संचालकों के साथ बैठक की। इसमें डीसी ने निजी स्कूल संचालकों को सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत अपनी बसों को संचालित करने के दिशा-निर्देश जारी किए।

डीसी प्रीति ने कहा जिला प्रशासन विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। सभी निजी स्कूल संचालक सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत अपनी बसों को संचालित करें। बसों में जो भी खामियां हैं, उन्हें दुरुस्त करवाया जाए। इसके साथ ही बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें। ऐसे विद्यार्थियों का डाटा भी एकत्रित किया जाए, जो बच्चे स्कूल बसों में न आकर अन्य वाहनों के माध्यम से स्कूल में आते हैं।
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उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सुरक्षित आवागमन की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होती है। सभी स्कूल संचालक सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी में निर्धारित मानकों व मापदंडों का पालन करें।

सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी का पालन न करने के कारण जब कोई सड़क हादसा होता है तो पीड़ित परिवार के लिए असहनीय होता है। इसलिए सुनिश्चित करें कि सभी स्कूल बसें पॉलिसी के सभी मानकों पर खरी उतरे। इसके साथ ही स्कूल में आने वाले सभी शिक्षक या अन्य स्टाफ भी यातायात नियमों का दृढ़ता से पालन करें।

अक्सर देखने में आता है कि कुछ विद्यार्थी यातायात नियमों का पालन नहीं करते, इसलिए उनकी विशेष काउंसलिंग की जाए और उनके माता-पिता को भी इस संदर्भ में जागरूक किया जाए। निजी स्कूल संचालकों के प्रतिनिधि मंडल ने आश्वासन दिया कि वे सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत स्कूल बसों को चलाएंगे और विद्यार्थियों को यातायात नियमों में जागरूक करेंगे।

इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट, अतुल शर्मा, जोगिंदर ढुल, नराता राम, प्रदीप, बलिंद्र संधु, खुशी राम, कुलदीप, धर्मवीर के अलावा अन्य निजी स्कूल संचालक मौजूद रहे।
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यातायात नियमों के संबंध में दें गृहकार्य

डीसी ने कहा कि आने वाली जून की छुट्टियों में यातायात नियमों के संबंध में गृहकार्य दिया जाए, ताकि बच्चे घर पर यातायात नियमों के बारे में जान सके व अपने जीवन में उतार भी सके। इसके साथ ही यातायात नियमों को लेकर सेमिनार आदि भी स्कूल में आयोजित किए जाएं। इन सेमिनार में अभिभावकों को भी शामिल करें।
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