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पिता की हर आज्ञा का करें पालन : विज्ञानानंद

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गुहला-चीका। अग्रवाल धर्मशाला चीका में चल रही श्री राम कथा रविवार को संपन्न हो गई। अंतिम दिन की कथा का शुभारंभ सीवन के प्रमुख समाजसेवी सरदार गुरमीत सिंह ने किया। विज्ञानानंद महाराज ने सरदार गुरमीत सिंह को सम्मानित किया। विज्ञानानंद महाराज ने कहा कि संसार में जितने भी सुख दुख मन द्वारा मान लेते पर ही हमें महसूस होते हैं। हमें अपने पिता की हर आज्ञा का पालन करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि यदि पानी से भरे आधे गिलास को हम आधा खाली मान लेते हैं तो वह हमें आधा खाली नजर आएगा और यदि हम उसे आधा भरा देखते हैं तो वह हमें आधा भरा नजर आएगा, ठीक इसी प्रकार की स्थिति हमारे मन की है। उन्होंने कहा कि महाराजा दशरथ ने भगवान राम के वनवास को मन से स्वीकार नहीं किया लेकिन श्री राम ने उसे मन से स्वीकार किया और उन्हें कुछ नहीं हुआ। व्यक्ति को अपने पिता की हर बात को मानना चाहिए, बशर्ते वह धर्म विरोधी ना हो। उन्हें कहा कि जब श्री राम को वनवास मिला तो उनके पिता दशरथ नहीं चाहते थे कि राम वनवास जाए लेकिन इस सबके बावजूद श्री राम ने पिता का कहा ना मानकर धर्म अनुरूप कार्य किया। वहां पर धर्म का पालन पिता के आदेश से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण था। भगवान श्री राम ने रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाएं पर वचन ना जाए की रीत निभाई। उन्होंने बताया कि वहीं प्रहलाद के पिता हिरणयाकश्यप कहते थे कि में ही तुम्हारा विष्णु है लेकिन भगत प्रह्लाद ने उनकी बात नहीं मानी। मुख्यातिथि सरदार गुरमीत सिंह ने कहा कि धर्म के काम हमें हमारी संस्कृति से जोड़ते है ऐसे ये कार्य निरंतर चलते रहने चाहिए। अंत में कथा के संयोजक प्रेम सिंह पुनिया, परमानंद गोयल, अशोक गर्ग, मनोज मित्तल, मंगत राम बंसल, विनोद गर्ग आदि ने मुख्यातिथि का सम्मानित किया। कथा के समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस मौके पर हरदीप पुनिया, गुरविंद्र सिंह, जोरा सिंह, जसबीर सिंह भी मौजूद रहे।
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