संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय मार्ग के पास स्थित बात्ता गांव के पुराने बस स्टैंड के पास स्थित तालाब में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है। तालाब और उसके आसपास भारी दुर्गंध फैल गई है, जिससे आसपास के लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात इतने गंभीर हैं कि दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे शासन-प्रशासन से जल्द राहत देने की मांग कर रहे हैं।
संजीव, लछमन शर्मा, बलजीत शर्मा, पवन राणा, संजू राणा, हिस्म सिंह, राजेश राणा और विजय शर्मा ने बताया कि दुर्गंध के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उनका आरोप है कि तालाब में मछली पालन का ठेका इस संकट की मुख्य वजह है। ठेकेदारों की लापरवाही के कारण मछलियां मर रही हैं। ग्रामीणों ने ठेका रद्द करने की तत्काल मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकता है।
सरकार तालाबों के विकास के लिए पर्याप्त बजट खर्च कर रही है, जिसमें तालाबों का सौंदर्यीकरण, स्वच्छ जल भराव, गंदे पानी की निकासी, पौधरोपण, संरक्षण, रोशनी और अन्य सुधार कार्य शामिल हैं। बात्ता गांव के तालाबों की हालत देखकर सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि तालाब के लिए बजट का सही उपयोग हो रहा है या नहीं, बताएं।
सड़क पर गिरीं मछलियां बचाने पर मिली तारीफ
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। करनाल रोड रेलवे फाटक के पास शनिवार दोपहर करीब 12 बजे सड़क अचानक तमाम मछलियां तड़पती नजर आईं। तेज गर्मी और तपती सड़क पर गिरते ही कई मछलियां मर गईं वहीं कुछ गुजर रहे वाहनों के नीचे आने से दम तोड़ गईं।
यह देख ज्यादातर लोग आगे बढ़ गए, लेकिन एक राहगीर ने अपनी गाड़ी रोककर तड़पती हुई मछलियों को पॉलीथीन में इकट्ठा किया और एक-एक कर सावधानी से उन्हें सुरक्षित पानी में छोड़ा। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया।
बताते हैं कि किसी वाहन से ये मछलियां गिर पड़ी थी लेकिन वाहन सवार को पता नहीं चल पाया और वह आगे बढ़ गया। जल के बिना सड़क पर 40-50 मछलियां तड़पने लगीं तो लोगों का ध्यान उधर गया लेकिन ज्यादातर उनकी अनदेखी कर वहां से निकल गए।