संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कौल के तत्वावधान में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ गांवों में जागरूकता अभियान चलाया गया। म्योली और डुलयानी गांवों में आयोजित इन शिविरों में ग्रामीणों को बेटा-बेटी के समान अधिकारों और भ्रूण हत्या की सामाजिक व कानूनी गंभीरता के बारे में जागरूक किया गया।
म्योली गांव में आयोजित शिविर की अध्यक्षता सरपंच मिठन लाल ने की, जिसमें वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्याम सुंदर के निर्देश पर वजीर सिंह और एमपीएचडब्ल्यू उर्मिला देवी ने ग्रामीणों को संबोधित किया।
डुलयानी गांव में उप-स्वास्थ्य केंद्र मोहना की ओर से शिविर का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सरपंच प्रतिनिधि शंकर ने की। यहां सीएचओ मेघराज, राजेश, गीता देवी और सुदेश (एमपीएचडब्ल्यू) ने ग्रामीणों को भ्रूण हत्या से होने वाले सामाजिक नुकसान के प्रति आगाह किया।
शिविरों में वक्ताओं ने कहा कि भ्रूण हत्या न केवल पाप है, बल्कि समाज के लिए भी अभिशाप बन चुकी है। गिरते लिंगानुपात का मुख्य कारण यही है, जिसे रोकना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। आंगनबाड़ी सुपरवाइजर जसवंत कौर और अन्य वक्ताओं ने कहा कि गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच कराना कानूनी अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि सभी गर्भवती महिलाओं का 10 सप्ताह के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
शिविरों के अंत में ग्रामीणों को कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ शपथ दिलाई गई कि वे न तो स्वयं ऐसा अपराध करेंगे और न ही किसी को करने देंगे। इन शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों, आशा वर्करों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों ने भाग लिया।
बिना मान्यता प्राप्त केंद्रों में गर्भपात न सिर्फ महिला के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे कन्या भ्रूण हत्या का संदेह भी पैदा होता है। एमटीपी एक्ट का पालन सभी केंद्रों के लिए अनिवार्य है। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन