पिछले कई महीनों से शहर के अंदर व बाहर गैस कंपनी की ओर से पाइप दबाने के लिए गलियों व सड़कें उखाड़ रखी है। जिसके कारण कॉलोनी वासियों का आवागमन बाधित हो रहा है। वहीं जनकपुरी कॉलोनी में भी कई जगहों पर गड्ढे खोदे गए हैं, जो खुले ही पड़े हुए हैं। यह गड्ढे 4-5 फुट गहरे हैं।
कॉलोनीवासी शमशेर सिंह, ईश्वर सिंह, मेहरचंद, पवन, आजाद, विजय सिंह, अजय कादियान, सुरेश कुमार व विकास ने बताया कि जनकपुरी कॉलोनी में गली नंबर पांच में गड्ढे में गिरने का भय बना हुआ है। अब तक कई बेसहारा पशु इसमें गिर चुके हैं। एक पालतू पशु की तो इसमें गिरने से मौत भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रात के समय में गली में अंधेरा होने से बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। इन गड्ढों के पास न तो कोई सुरक्षा चक्र है और न ही सावधानी बोर्ड लगा हुआ है। यह खुले गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गली में छोटे बच्चे भी खेलते हैं। जब बच्चे खेलते हैं तो परिजनों के मन में दुर्घटना होने का भय बना रहता है। कॉलोनीवासी मेहरचंद ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कंपनी के एक अधिकारी से भी बात की है। उन्होंने जल्द ही समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया है।
बरसात रुकने के बाद नगर में मकानों के गिरने का सिलसिला आरंभ हो गया है। दो दिन चली बरसात के बाद मेन बाजार में खड़े पुराने मकानों में से दो मकान तो भरभरा कर गिर पड़े जबकि अन्य कई मकान गिरने के कगार पर हैं। इन मकानों के अधिकांश मालिक कलायत नगर छोड़ कर पूर्व में ही अन्यत्र कहीं बस गए हैं। संभाल न होने के कारण ये पुराने मकान कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। नगर में जलभराव के कारण अन्य कई भवनों व अभी बन रहे पार्क की दीवार भी कभी भी गिर सकती है। पानी के भारी जमावड़े के कारण से महिला कॉलेज से बस स्टैंड के बनाई जा रही सड़क की टो वाल भी एक स्थान से गिर गई।
मेन बाजार के नाम से जाना जाने वाले क्षेत्र में अधिकांश पुराने छोटी ईंटों के मकान हैं। इन मकानों के अधिकांश मालिक कलायत छोड़ कर जा चुके हैं जिसके कारण से इन मकानों की मरम्मत न होने के कारण ये लगातार जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। बरसात के समय में इनमें पानी मरने से हालत इतने विकट हो जाते हैं कि इनके पास से गुजरने में भी डर लगता है। राधेश्याम, बंसीधर, संजय राणा, श्याम लाल, त्रिलोक चंद, सुशील वर्मा, अशोक कुमार ने बताया कि कुछ तो मकान जर्जर हालत में हैं ऊपर से सीवरेज की लीकेज लोगों के लिए भारी समस्या बनी है। मेन बाजार से लेकर बुद्धा चौक तक हर मकान व दुकानों में भारी दरारें आई हुई हैं। जिसके कारण से कभी भी कोई भी दुर्घटना हो सकती है। राधेश्याम भट्ट ने बताया कि मेन बाजार में स्थित गोगा मंदिर सीवरेज व बरसाती पानी के कारण से बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है जो कभी भी गिर सकता है। लोगों ने मांग की है कि या तो इन पुराने मकानों को नगर पालिका गिरवाए या फिर मालिकों को सूचना देकर उन्हें ठीक करवाए ताकि कोई जनहानि होने से बचा जा सके।
नगरपालिका चेयरपर्सन शशिबाल कौशिक ने कहा कि नगर में पुराने मकानों का मुद्दा वाकई में अति संवेदनशील है। नगर पालिका जेई व एमई को ऐसे मकानों की सूची बनाने के लिए कहा जा रहा है। यदि इन मकानों में कोई नहीं रहता तो उनके मालिकों का पता लगाकर उन्हें ठीक करवाने या गिरवाने के लिए नोटिस भेजा जाऐगा।