संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। युवाओं में विदेश जाकर रहने और रुपये कमाने की होड़ लगी है और क्षेत्र का प्रेमपुरा गांव इसमें सबसे अग्रणी कहा जाता है लेकिन वहीं के सतनाम सिंह इंग्लैंड से वापस लौट आए। उनका कहना है कि पिता का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने ऐसा किया। उन्होंने गांव के गुरुद्वारा के ग्रंथी को एक मकान बना कर दिया है, जिस पर करीब 30 लाख रुपये लागत आई है। इसके अलावा कई सामाजिक कार्यों को किया है और कर रहे हैं। सेवाभाव को देखते हुए उनकी पंचायत को जिला प्रशासन भी सम्मानित कर चुकी है।
उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान सड़क दुर्घटना में उनके पिता का देहांत हो गया था। विदेश से वापस आकर उन्होंने गांव में अपनी पत्नी परविंद्र कौर को सरपंच का चुनाव लड़वाया। उनकी पत्नी परविंद्र कौर अब गांव की सरपंच हैं। सतनाम सिंह बताते हैं कि उनके पिता ने चुनाव के दौरान ग्रंथी के लिए मकान बनाने का वादा किया था। उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने पिता के वादे को पूरा किया और गांव गुरुद्वारे के ग्रंथी को नया मकान बनाकर चाबी उसे सौंप दी है।
इसके अलावा ग्राम पंचायत प्रेमपुरा की सरपंच परविंद्र कौर के पति सतनाम सिंह ने अपने निजी कोष से आसपास के लगभग 10 गांवों के लिए एंबुलेंस की नि:शुल्क सेवा शुरू की है, जो ग्रामीण क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्ति के लिए बहुत मददगार साबित हो रही है। इसके साथ की ग्राम पंचायत प्रेमपुरा ग्रामीणों को शहर की तमाम बेहतर सुविधाएं गांव में ही लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वह चाहे स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं हो या फिर अन्य रोजमर्रा से जुड़ी तमाम मूलभूत सुविधाएं हो।
इसके अलावा बात चाहे गांव में सफाई व्यवस्था की हो, बिजली, पानी या सीवरेज व्यवस्था की हो, वह काम कर रहे हैं। गांव में ग्राम सचिवालय के लिए जगह नहीं थी तो सरपंच ने अपनी निजी जमीन पंचायत को दान कर दी। इसी तरह गांव में ई-लाइब्रेरी बनाने का भी काम चल रहा है, इन सभी को बेहतरीन करने ग्राम पंचायत लगातार सार्थक कदम उठा रही है। इन सभी कार्यों को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर जिले की एकमात्र ग्राम पंचायत प्रेमपुरा सम्मानित किया हैं, ताकि इनके कार्यों से जिले की और ग्राम पंचायतें भी सीख ले सकें।