संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सरकार किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ इन-सीटू व एक्स-सीटू पराली प्रबंधन के लिए दी जाएगी प्रोत्साहन राशि दे रही है। इसके लिए पोर्टल पर पंजीकरण करवाए जा सकते हैं। यह रकम किसानों के खातों में सीधे भेजी जाएगी। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने दी।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विभाग के अधिकारियों के साथ जिला कार्य योजना पर विस्तृत विचार-विमर्श के दौरान उन्होंने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेतों में पराली न जले इसके लिए किसानों को जागरूक करने के लिए रूपरेखा बनाई जा रही है।
उन्होंने सरकार के निर्देशों पर 36 रेड व 107 येलो जोन गांव के सभी कस्टम हायरिंग सेंटर व व्यक्तिगत किसानों को मुख्य तौर पर संपर्क करने के बारे में चर्चा की। कृषि उप निदेशक ने कहा कि पराली जलाने के मामले में अति संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी रखी जाए और हर गांव पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा कृषि विभाग, ग्राम सचिव तथा पटवारियों की ग्राम स्तर पर टीमें बनाई जाएंगी, जो कि किसानों को फसल अवशेष न जलाने तथा पराली प्रबंधन के फायदों के बारे में जागरूक करेंगें।
उन्होंने कहा कि किसी भी गांवों में पराली जलाने के घटना न हो, इसके लिए कृषि अधिकारी गांव स्तर पर गठित नोडल अधिकारी से तालमेल स्थापित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करेंगे।
डॉ. कर्मचंद ने कहा कि एक लाख 54 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की हुई है, जिसमें से 40 हजार हेक्टेयर में बासमती व एक लाख 14 हजार हेक्टेयर में गैर बासमती धान लगाई है। इससे लगभग नौ लाख 60 हजार टन पराली पैदा होती है। किसान पराली प्रबंधन कस्टम हायरिंग सेंटर व व्यक्तिगत किसानों के पास मौजूद फसल अवशेष कृषि यंत्रों से तय दरों पर किराये पर मशीनें लेकर प्रबंधन कर सकते हैं।