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Kaithal News: सोलर पावर ग्रिड के लिए किसानों ने जमीन देने से किया इंकार

Sat, 06 Sep 2025 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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37  कलायत में किसानों की जमीन से जुड़े मामले को लेकर चर्चा करते विभिन्न संगठन
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। नेशनल हाई-वे पर 300 एकड़ से अधिक भूमि पर बनने वाले सोलर पावर ग्रिड को बड़ी संख्या में किसानों ने जमीन देने से साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने योजना कार्य के नाम पर सक्रिय हुए कुछ दलालों की ओर से घर-घर जाकर गुमराह करते हुए भारी भरकम कमीशन की मांग करने व जमीन के मनमाने भाव तय करने से खफा होकर यह निर्णय लिया है। किसानों के मुताबिक जमीन के नियम अनुसार हिस्से तय करने की बजाए मर्जी से राशि का भुगतान किया जा रहा है। काफी ऐसे मामले में जिनके पास न तो सिंचाई पानी के दस्तावेज हैं व राजस्व रिकार्ड अनुसार वे खेवट में मौके पर मौजूद हैं। नाराजगी जताने वाले किसानों में बड़े रकबे से संबंधित किसान भी शामिल हैं।
किसानों को जागरूक करने के लिए विभिन्न संगठनों ने व्यापक स्तर पर जागृति अभियान गतिमान करने का भी निर्णय लिया है। इसको लेकर प्राचीन श्री कपिल मुनि सरोवर तट पर संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें ग्रिड योजना कार्य में पूर्ण पारदर्शिता लाने व किसानों की बेशकीमती भूमि को औनेपौने दामों पर किसी के हाथ न सौंपने को लेकर रूप रेखा तय की गई। विश्व हिंदू परिषद जिला उपाध्यक्ष बीरभान निर्मल, राजेश राणा, सलिंद्र प्रताप राणा, जस्सी राणा, पार्षद महीपाल पंवार, कुलदीप दहिया, राहुल राणा, महेंद्र सिंह, सतीश कुमार, जोगेंद्र व दूसरे किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग खुद को बिचौलिए बताकर न केवल अपने ढंग से जमीन के भाव तय कर रहे हैं बल्कि तरह-तरह से गुमराह करते हुए भूमि खरीदने के प्रयास में हैं। किसानों ने कहा कि वे अब न तो किसी भी कमीशन आधारित टोली से बातचीत करेंगे और न ही जमीन बेचने के मूड में हैं। पावर ग्रिड प्रोजेक्ट की आड़ में सस्ती दरों पर जबरन भूमि अधिग्रहण की मंशा को सिरे से खारिज करते हुए इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी। किसानों ने खरीद का प्रस्ताव लेकर आने वालों को उनके खेतों व घरों से दूर रखने की चेतावनी दी।
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समाज सेवी संगठनों का कहना है कि अभी तक जो थोड़ी बहुत जमीन खरीदी गई है उसके रिकार्ड को सिरे से जांचने की जरूरत है। संदेह है कि भोले-भाले किसानों को अंधेरे में रखकर उनके नाम से नलकूप, भवन, पेड़-पौधों और अन्य क्षति के नुकसान वसूलते हुए एक टोली खुद मुनाफा कमा रही है। जबकि किसानों को उनकी जमीन की कीमत भी मोटा कमीशन काटकर दी जा रही है। बताया जा रहा है कि पहले सेे किसी अन्य बैंक मेंं खाता होने के बावजूद भी जमीन बेचने वालों को दो निजी बैंकों में नए सिर से खाता खुलवाया जाता है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक पारदर्शी प्रक्रिया और उचित मुआवजा सुनिश्चित नहीं किया जाता तब तक किसान न तो जमीन बेचेंगे और न ही किसी एजेंट या संस्था से इस मुद्दे पर बात करेंगे। किसान संगठनों ने प्रशासन से भी मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और हेराफेरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।
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एग्रीगेटर के माध्यम से खरीदी जानी है जमीन

जिला राजस्व अधिकारी चंद्रमोहन बिश्नोई ने बताया कि पावर ग्रिड की जमीन से संबंधित कार्यवाही एग्रीगेटर के माध्यम से पूरी होनी है। राजस्व विभाग योजना कार्य के लिए जमीन को खरीदने की प्रक्रिया में सीधे तौर से शामिल नहीं है। इसलिए सरकार की नीति अनुसार ही किसान प्रक्रिया में शामिल हों।


37  कलायत में किसानों की जमीन से जुड़े मामले को लेकर चर्चा करते विभिन्न संगठन

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