कैथल। जिले के किसानों की मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाने में रुचि कम हुई है। हालत यह है कि बार-बार अपील के बावजूद अब तक 65 प्रतिशत किसानों ने ही पंजीकरण करवाया है। सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ भी पोर्टल पर फसल का पंजीकरण करवाने वाले किसान ही उठा पाएंगे। यहां तक कि सरकार पोर्टल पर पंजीकृत किसानों की ही उपज खरीद रही है। पहले भी बिक्री के दौरान जिन किसानों ने पंजीकरण नहीं करवाया, उन्हें सरकारी कीमतों पर फसल बेचने तक का मौका नहीं मिला।
रबी सीजन की फसलों का पंजीकरण करवाने के लिए 15 फरवरी अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। ऐसे में किसानों को अंतिम तिथि से पहले ही पंजीकरण करवाना होगा। जो किसान अपनी फसलों का पंजीकरण नहीं करवा पाएंगे, वे सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित रह सकते हैं। जिले में चार लाख 95 हजार एकड़ में रबी की फसल की बुवाई हुई है। इनमें से करीब तीन लाख 21 हजार एकड़ भूमि का ही पंजीकरण हुआ है। जो कुल बुवाई योग्य भूमि का 65 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट होता है कि अब तक काफी कम किसानों ने अपनी फसलों का पंजीकरण करवाया है। ऐसे में बिना पंजीकरण करवाने वाले किसान अगर सरकार से अनुदान चाहते हैं तो भी उसे अपनी फसलों का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर करवाना होगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी लोगों को फसल पंजीकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है। फिलहाल सरकार ने 15 फरवरी तक पोर्टल खोला है। इस पर किसान अपनी फसलों को पंजीकरण कर सकते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को फसल बेचने में सुविधा पहुंचाने के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं का सीधे लाभ देना भी है। पहले के मुकाबले बड़ी संख्या में किसान फसल पंजीकरण की अनिवार्यता को समझते हुए अपनी फसलों का पंजीकरण करवाने लगे हैं।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि अब तक जिले के 65 प्रतिशत किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। जिले में चार लाख 95 हजार एकड़ में रबी की फसल की बुवाई हुई है। इसमें से लगभग तीन लाख 21 हजार एकड़ का पंजीकरण हुआ है। सभी किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए 15 फरवरी तक अपनी फसलों का पंजीकरण कराएं।