संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मौसम की मार के साथ बारिश के बाद अनाज मंडी में धान की फसल खरीद के संदर्भ में मंगलवार को किसानों का आक्रोश देखने को मिला। बारिश से धान में नमी बढ़ने पर एमएसपी से 300 से 400 रुपये कम दाम पर फसल खरीदी गई, जिसे लेकर किसानों ने विरोध जताया। उधर, मंगलवार को फिर से बारिश होने पर किसानों का धान मंडियों में भीगता नजर आया। उनका कहना था कि इससे धान की नमी में इजाफा होना तय है।
कैथल की मार्केट कमेटी के कार्यालय के सामने किसानों ने प्रदर्शन किया और कैथल प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए। नाराज किसानों का कहना था कि वे मंडी में पूरी पकी-पकाई धान की फसल लेकर आए थे। बारिश से धान में नमी (मॉइश्चर) बढ़ गई, इसमें किसानों का कोई दोष नहीं है। ऐसे में फसल की खरीद में किसानों को उचित रियायत दी जानी चाहिए।
किसान नेता होशियार गिल ने कहा कि एक तरफ किसानों पर प्राकृतिक आपदा का प्रभाव है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की मार भी है। जो सरकार एमएसपी पर फसल खरीद का दावा करती है, वह केवल चुनावी वादों तक सीमित है। हकीकत में कैथल की अनाज मंडी में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता।
इसके अलावा, कैथल अनाज मंडी में जिन शेडों के नीचे निजी कंपनियों के कट्टे रखे हुए थे, उन्हें प्रशासन ने हटा दिया। मंगलवार की दोपहर में हुई बारिश के कारण फसल बिक्री पर असर पड़ा और पूरा दिन बिक्री धीमी गति से चली।
कई किसानों ने धान के मॉइश्चर चेक करने वाली मशीन पर भी सवाल उठाए। किसान जयराम ने कहा कि एक ही ढेरी से दो-तीन बार सैंपल लेने पर अलग-अलग आंकड़े आए, ऐसे में मशीन पर भरोसा करना मुश्किल है। किसानों का स्पष्ट संदेश था कि ना पैदावार सही है, ना रेट, और एमएसपी लागू नहीं होने से वे प्रतिकूल स्थिति में हैं। उन्होंने प्रशासन से फसल खरीद में पारदर्शिता और किसानों के हित में निर्णय लेने की मांग की।
कैथल मंडी में बारिश से भीगता धान।