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Kaithal News: एमएसपी नहीं मिलने से किसानों को उठाना पड़ रहा करोड़ों का नुकसान

Sun, 21 Sep 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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गुहला चीका। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर की सभा हलका गुहला में थेहबुटाना गांव के गुरुद्वारा परिसर में शनिवार को आयोजित हुई। सभा में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि ओईसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 से 2017 तक सरकार की ओर घोषित एमएसपी न मिलने के कारण किसानों को 45 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि ओईसीडी की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022-23 में किसानों को 12.55 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने पिछले वर्ष अधिसूचना जारी कर 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने की घोषणा की थी, लेकिन अब बाजरा, नरमा और धान की फसलों की मंडियों में बिक्री शुरू होने के बावजूद उन्हें एमएसपी पर नहीं खरीदा जा रहा है।सभा में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
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कोई भी पार्टी किसानों के हित में नहीं सोचती ः गिल

किसान नेता होशियार सिंह गिल ने कहा कि किसानों ने सभी राजनीतिक पार्टियों की सरकारें आजमाकर देख ली हैं। कोई भी राजनीतिक पार्टी वास्तव में किसानों के हित में सोचती नहीं है। जब पार्टियां विपक्ष में होती हैं तो किसानों के हित की बातें करती हैं, लेकिन सत्ता में आते ही 180 डिग्री का यू-टर्न लेती हैं और किसानों के खिलाफ नीतियां बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण किसानों की हजारों एकड़ फसलें खराब हुई हैं, लेकिन सरकार ने केवल 7,000 से 15,000 रुपये तक का मुआवजा देने की घोषणा की है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सभा का संचालन देवेंद्र सिंह ने किया, और मुख्य वक्ताओं के रूप में जगजीत सिंह डल्लेवाल, होशियार सिंह गिल और अभिमन्यु कोहाड़ शामिल हुए। उन्होंने मांग की कि खराब हुई फसलों का मुआवजा 50,000 रुपये प्रति एकड़ दिया जाए।
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एकजुट होकर आंदोलन की जरूरत ः कोहाड़

किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून बनवाने के लिए देश के किसानों को एकजुट होकर आंदोलन करने की आवश्यकता है। इसके लिए वे गांव-गांव जाकर यूनियन की कमेटियां गठित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने वाले किसानों को जेल भेजने का निर्देश दिया है, लेकिन किसान कोर्ट से पूछना चाहते हैं कि 2019 में दिए गए फैसले के अनुसार पराली के निपटान के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना था। छह साल बीत जाने के बाद भी राज्य सरकारें फैसले को लागू नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले राज्य सरकारों को इस फैसले को लागू करने का आदेश जारी करे।
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