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Kaithal News: भारत-पाक बंटवारे के 77 वर्ष बाद नागपुर से मिलने आया परिवार

Tue, 24 Dec 2024 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। भारत-पाक बंटवारे के 77 वर्ष बाद 101 वर्षीय बहादुर चंद मदान को नागपुर से मिलने के लिए उनका चचेरा परिवार मिलने आया। इस मौके पर बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी के आंसू छलक उठे।

बहादुर चंद मदान के चाचा कर्मचंद के पुत्र ज्ञान चंद के पांच बेटे नागपुर में बड़े कपड़ा व्यापारी हैं। वे आजादी के 77 साल बाद कैथल में उनसे मिलने पहुंचे। यहां बहादुर चंद मदान के बेटे राम मदान ने परिवार के मिलन को एक बड़े समारोह के रूप में मनाया।
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नागपुर से आए परिवार का भारत भूषण मदान, अजय मदान, इंद्रजीत मदान, शिव कुमार मदान, मनीष मदान ने भव्य स्वागत किया। बहादुर चंद मदान और उनके दो भाई हर भगवान, हरबंस लाल और एक बहन बंती देवी से नागपुर से आए परिवार के सदस्यों का आपसी मिलन एक ऐतिहासिक पल रहा।

बहादुर चंद मदान ने पाकिस्तान के समय हुई दर्दनाक घटना और भारत में आकर संघर्ष पूर्ण जिंदगी की शुरुआत की दर्दनाक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके चाचा कर्मचंद के परिवार ने धर्म परिवर्तन करना मंजूर नहीं किया और अपने परिवार के 27 लोगों के साथ कुएं में छलांग लगाकर जिंदगी खत्म कर ली थी। उस समय उनके पुत्र ज्ञान चंद मामा के घर गया हुआ था। वह जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर पाकिस्तान से भारत आ गया। कहा कि भारत में आने के पश्चात 77 वर्ष तक उन्हें अपने चचेरे भाई ज्ञान चंद का कुछ पता नहीं लगा।

उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व कुरुक्षेत्र के केशव मेहता ने उनका एक इंटरव्यू किया, जिसे उन्होंने यूट्यूब पर डाल दिया। इसे नागपुर में रह रहे ज्ञान चंद पुत्र भारत भूषण मदान ने देखा। इसके बाद कैथल में बहादुर चंद के बेटे राम मदान से संपर्क किया। तब राम मदान ने उन्हें कैथल आने और अपने परिवार के बुजुर्गों से मिलने का निमंत्रण दिया।

जब कैथल के एक पैलेस में नागपुर से आए भारत भूषण मदान उन के भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों का राम मदान परिवार के सदस्यों और कैथल के नागरिकों ने फूलों की वर्षा के साथ उनका स्वागत किया। भारत भूषण मदान ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह एक ऐतिहासिक मिलन है, जो परिवार के बिछड़ने के 77 साल बाद हुआ।

उन्होंने कहा कि यह हमारी जिंदगी के बेहद अनोखे पल हैं। उन्होंने कहा कि हमारी खुशी को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि हमारे बुजर्गों ने अपने हिंदू धर्म की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किये जिस का उन्हें गर्व है।

उन्होंने बताया कि उनके पिता ज्ञान चंद भारत पाक बंटवारे के समय मात्र 13 वर्ष के थे और वह उस समय अपने मामा के घर गए हुए थे। वह अपनी जान बचाकर भारत आ गए और रोहतक में रहकर मेहनत मजदूरी करनी शुरू की और शिक्षा भी ग्रहण की।
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उन्होंने बताया कि हम पांच भाई और एक बहन है और हम बाद में नागपुर जा कर बस गए। वे पांचों भाई इकट्ठे कपडे़ का थोक व्यापार करते है। राम मदान और भांजे सुभाष चुग ने कहा कि हम खुश हैं कि हमारे बुजुर्गों को उनके बिछड़े हुए परिवार के सदस्य मिले हैं।
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