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Kaithal News: बाबा लदाना डेरे में मेला, मांगी पशुधन की समृद्धि

Sat, 04 Oct 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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28 बाबा लदाना में लगे तीन दिवसीय मेले में  पूजा अर्चना करते श्रद्धालु
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी मठ में दशहरे पर लगने वाला वार्षिक मेला दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। एकादशी पर डेरे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। पूजा करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुबह से रात तक लाइनें लगी रही। बाबा राजपुरी के मेले में एकादशी के दिन आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर के स्थानों से भी श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बाबा राजपुरी की प्रतिमा पर दूध, फल, फूल व प्रसाद चढ़ाकर अपने परिवार के साथ-साथ धन-धान्य एवं पशुधन की समृद्धि के लिए कामना की। मंदिर के बाहर बने सरोवर में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।

एकादशी के दिन कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने पूजा की और अनाज का दान भी किया। वहीं मेले में पहुंचे बच्चों और महिलाओं ने जमकर खरीदारी भी की। जिला पुलिस की ओर से सुरक्षा को लेकर कड़े प्रबंध किए गए। महिला व पुरुष कर्मचारी विभिन्न रास्तों से लेकर मेला स्थल पर सुरक्षा में जगह-जगह तैनात रहे।
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डेरा बाबा राजपुरी पर हर वर्ष दशहरा, एकादशी और द्वादशी पर यह तीन दिवसीय मेला लगता है। बाबा की धूनी पर प्रसाद और ध्वजा चढ़ाई जाती है। पहले दो दिन प्रदेशभर से लोग पूजा करने आते हैं और तीसरे दिन गांव की महिलाएं पूजा करती हैं। विशाल मेले में बच्चे और महिलाएं जमकर खरीदारी करते हैं। मंदिर को सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है। तीन दिनों तक भंडारा भी लगाया जाता है।

बाबा राजपुरी पशुधन में लाभ के लिए प्रसिद्ध हैं। इन तीन दिनों में सैकड़ों क्विंटल दूध यहां चढ़ाया जाता है, जिससे प्रसाद तैयार किया जाता है। मेले में रोडवेज और पुलिस विभाग की ओर से पुख्ता प्रबंध किए जाते हैं और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहता है। यह मेला इस बार तीन अक्तूबर से दशहरा के मौके पर आयोजित होगा। करीब 550 साल पुराना यह मेला भक्तों के बीच विशेष मान्यता के लिए जाना जाता है।

मान्यता है कि डेरा बाबा राजपुरी में पशुओं की सुख-समृद्धि के लिए जो मन्नत मांगी जाती है, वह पूरी होती है। इसलिए हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं को धूप सामग्री वितरित की जाएगी, जिसे आग पर डालकर पशुओं के आसपास धूनी दी जाती है।

डेरे के महंत दूजपुरी महाराज ने बताया कि मान्यता है कि यहां 550 साल पहले गांव में एक बच्चे का जन्म हुआ था, जो शैशव काल से ही महान योगी के रूप में जाने गए। बाद में वे बाबा राजपुरी के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह डेरा स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस और उनके गुरु महंत तोतापुरी महाराज की तपोस्थली भी रहा है। यहां महंत तोतापुरी की समाधि स्थित है। महंत ने बताया कि माता हिगलाज अष्टमी की रात को डेरा में बने मंदिर में आती हैं और वर्षों पुराने जाल के पेड़ पर धागा बांधकर जाती हैं। दशहरा के दिन जाल के पेड़ पर बाबा राजपुरी और माता हिगलाज की पूजा कर ध्वजा चढ़ाई जाती है। बाबा राजपुरी के देश भर में करीब 365 मठ हैं।
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पूजा की शुरुआत का इतिहास

बाबा राजपुरी डेरे का इतिहास यह बताता है कि उस समय आस-पास के कई गांवों के भैंस चराने वाले अपनी भैंसों को एक स्थान पर रखते थे। एक दिन बाबा राजपुरी वहां से जा रहे थे, तब भैंस चराने वालों ने कहा कि बाबा, हमारी भैंसें उठ जाएंगी। बाबा ने कहा कि अब ये भैंसें नहीं उठेंगी। कुछ देर बाद जब लोग भैंसें उठाने गए, तो एक भी भैंस नहीं उठी। तब लोगों को बाबा का चमत्कार समझ में आया। इसके बाद सभी लोग बाबा के पास गए और माफी मांगी। बाबा ने कहा कि एक भैंस को छोड़कर बाकी सभी उठ जाएंगी और ऐसा ही हुआ। तभी से पशुओं की सुख-शांति के लिए बाबा राजपुरी की पूजा होती है।

28 बाबा लदाना में लगे तीन दिवसीय मेले में  पूजा अर्चना करते श्रद्धालु

28 बाबा लदाना में लगे तीन दिवसीय मेले में  पूजा अर्चना करते श्रद्धालु

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