संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। भारतीय किसान मजदूर यूनियन कमेरा वर्ग के पदाधिकारियों ने नीमवाला गांव बुधवार को बैठक की। इस दौरान उन्होंने सरसों की फसल की खरीद शुरू न करने पर सरकार के खिलाफ रोष जताया है।
हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ था। इसके बाद तिलहन किसान चिंतित हैं। इसी बीच हरियाणा के तिलहन किसान आगे की वित्तीय परेशानियों से बचने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर सरकारी खरीद का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष महावीर चहल ने कहा कि लगभग पूरे हरियाणा की मंडियों में सरसों की फसल की आवक जोरों पर है लेकिन अब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इस कारण किसानों को 1200 से 1600 रुपये तक का नुकसान प्रति क्विंटल हो रहा है। युवा प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र मागो माजरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ तो ओलावृष्टि से किसान की फसल का नुकसान हो गया और दूसरी तरफ सरकार जान बूझकर किसानों की फसल न खरीद कर किसानों का आर्थिक नुकसान कर रही है।
उनका कहा कि सरकार ने 15 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद की घोषणा की है लेकिन तब तक करीब प्रतिशत किसान अपनी सरसों की फसल बेच चुके होंगे। उन्होंने कहा कि इसका कारण फसल को रोकने या स्टॉक करने में वे असमर्थ हैं। ऐसे में बाद में पूंजीपति व व्यापारी जरूर मुनाफा कमा लेंगे। इसलिए सरकार को तुरंत सरसों खरीद शुरू करनी चाहिए।
इस दौरान जिला अध्यक्ष बलकार मलिक खुराना, मनोज नीमवाला, कृष्ण मालखेड़ी, विकास चहल, सुरेश नरड, मन्नू चहल कई किसान मौजूद रहे।