फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: हर माणस नै लेणा चाहिए गीता का ज्ञान...

विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। सनातन धर्म मंदिर के वृद्ध आश्रम के हाॅल में शनिवार को अखिल भारतीय साहित्य परिषद हरियाणा की जिला इकाई कैथल ने गीता-जयंती के उपलक्ष्य में काव्य-गोष्ठी आयोजित की। काव्य गोष्ठी में हर माणस नै लेणा चाहिए गीता का ज्ञान पंक्तियों से समां बांधा। इस काव्य-गोष्ठी में शिक्षाविद, समाज-सेवी, वरिष्ठ नेता एवं सनातन धर्म मंदिर के प्रधान रवि भूषण गर्ग ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
विज्ञापन

गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्य सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान ने की। गोष्ठी का संचालन अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जिला इकाई कैथल के अध्यक्ष डाॅ. तेजिंद्र ने किया। मुख्य अतिथि रवि भूषण गर्ग ने कहा कि कर्म करो, चाहे आप इच्छा करें या न करें, फल निश्चित ही मिलेगा। स्वयं से प्रेम करो, अपने परिजनों से प्रेम करो व अपनी शक्ति को पहचानो। सबके पास सब कुछ है। उन्होंने उपस्थित रचनाकारों का आह्वान किया कि वे वक्त के साथ चलते हुए साहित्य-सृजन करते रहें। काव्य-गोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. अमृत लाल मदान ने गीता जैसे पावन ग्रंथ को लेकर अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि समय-समय पर गीता-ज्ञान ने मुझे असीम शांति की अनुभूति दी है।
उन्होंने गीता के संदर्भ में अपनी तीन शंकाओं को अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हे श्रीकृष्ण, हमें आज के युग के हिसाब से वैश्विक प्रेम की गीता का संशोधित, परिवर्धित संस्करण दें। उन्होंने रचनाकारों को अचूक लेखन-सूत्र देते हुए कहा कि वे लेखन करते समय समालोचनात्मक दृष्टिकोण रखें। किसी भी विषय पर लिखते समय उस विषय के हर बिंदु पर विचार करें। गोष्ठी का आरंभ महेंद्र पाल सारस्वत कण्व द्विवेदी की हरियाणवी रचना प्रस्तुत कर कहा, हे अर्जुन सारी बातां का सुण तोड़ रै। जिम्मेदारी सारी आपणी, मेरपै छोड रै।
विज्ञापन

गीता में हर समस्या के समाधान की उपलब्धता को लेकर सतबीर जागलान ने कहा, हर माणस नै लेणा चाहिए गीता का ज्ञान। गीता म्हं लिख्या होया सै, हर समस्या का समाधान। भगवान श्री कृष्ण के गीता-ज्ञान को दिव्य बताते हुए रविंद्र कुमार रवि ने कहा, भगवान कृष्ण ने अर्जुन को जो दिव्य ज्ञान कराया। विख्यात हुआ वह दुनिया में, वह गीता-ज्ञान कहलाया। भगवान केशव की स्तुति करते हुए सुरेश कुमार कल्याण ने कहा, ऋतुओं में तुम मदन हो, वेदों में तुम साम। सिद्धों में तुम कपिल मुनि, केशव तुम्हें प्रणाम।
डाॅ. तेजिंद्र ने भगवान श्री कृष्ण की ओर से दिए गए गीता ज्ञान पर कहा, बोले कृष्ण, सुनो हे अर्जुन, संशय मन के हटाओ। आगे बढ़ो तुम, युद्ध करो तुम, अपना गांडीव उठाओ। कुरु-भूमि का महिमा मंडन करते हुए सतपाल पराशर आनंद ने कहा, कुलछत्तर पावन धरा, जाणै सकल जहान। जित कृष्ण नै दिया गीता का शुभ दान। इनके अतिरिक्त भोला राम, रोहित शर्मा, डाॅ. चर्तभुज बंसल सौथा, डाॅ. विकास आनंद, रामफल गौड़, रिसाल जांगड़ा, डाॅ. हरीश चंद्र झंडई और कमलेश शर्मा ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें