कलायत। सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा अनावरण के मामले में राजपूत समाज ने पांच सूत्रीय मांगों को लेकर एकबार फिर से प्रदेशस्तरीय बेमियादी आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके तहत क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोज संघर्ष कमेटी के तत्वाधान में कलायत स्थित सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा के पास धरना दिया जा रहा है। इसमें हरियाणा के विभिन्न जिलों से राजपूत समाज के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। धरने में प्रदेश के अलग-अलग स्थानों से प्रतिदिन 11 लोग भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के उपाध्यक्ष सलिंद्र राणा ने बताया की पहले दिन के धरना में कलायत के अलावा करनाल, अंबाला, जींद, पानीपत से राजपूत समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने बताया की पहले दिन के धरने की अध्यक्षता वीर चक्र विजेता कर्नल देवेंद्र सिंह ने की। उन्होंने कहा कि कैथल में सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा अनावरण के विरोध में आवाज उठा रहे समाज के लोगों पर 19 जुलाई को किए गए लाठी चार्ज से समाज में रोष है।
राजपूत समाज के निर्दोष लोगों पर लाठीचार्ज व उनके समाज के इतिहास से हो रही छेड़छाड़ के विरोध में पूरे प्रदेश के राजपूत एक हैं। इस मुद्दे को लेकर सकल राजपूत समाज के प्रतिनिधियों ने पांच सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया है। जब तक मांगें नहीं मानी जाती, तक तक राज्य स्तरीय प्रदर्शन कलायत में जारी रहेगा। इसके अलावा समाज द्वारा राज्य के 1300 राजपूत बहुल गांवों में भाजपा नेताओं के प्रवेश पर जो रोक लगाई गई है, वह निरंतर जारी रहेगी।
पहले दिन भूख हड़ताल में कर्नल देवेंद्र सिंह करनाल, नरेंद्र राणा ददलाना पानीपत, विनोद थंबड अंबाला, विनोद गोंदर करनाल, महीपाल सरपंच करनाल, रिंकू राणा सिंघाणा जींद, होशियार सिंह खेड़ी कैथल, राजपाल सिंह अगौंध रमेश राणा अगौंध, अमन राणा राजौंद, डा.संदीप राणा राजौंद शामिल हुए।
सलिंद्र राणा ने बताया कि संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि 18 अक्तूबर को कैथल में राज्य स्तरीय स्वाभिमान यात्रा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस यात्रा में हरियाणा और उत्तर प्रदेश से राजपूत समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
यें हैं पांच मांगे-
1. राजपूत समाज पर अत्याचार करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई हो।
2. कैथल के तानाशाही भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर पर कार्रवाई की मांग।
3. क्षत्रिय समाज पर हुए अत्याचार के दौरान सरकार में बैठे राजपूत समाज के नेताओं पर भी कार्रवाई।
4. भविष्य में राजपूत समाज के इतिहास से छेड़छाड़ न हो, इसके लिए सरकार ठोस कदम उठाए।
5. सवर्ण आयोग का गठन हो।