संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन/कैथल। हरियाणा प्रदेश घुमंतू जाति प्रकोष्ठ के संयोजक एवं पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने कहा कि प्राचीन संस्कृति को संजोए रखने के लिए हरियाणा सरकार बेहतरीन कार्य कर रही है। लुप्त हुईं नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए करोड़ो रुपये की राशि से सरस्वती नदी पर घाटों के निर्माण के साथ साथ सुंदरीकरण का कार्य किया जा रहा है।
वसंत पंचमी के उपलक्ष्य पर पोलड़ गांव के प्राचीन संस्कृत मंदिर पर शनिवार को आयोजित सरस्वती महोत्सव कार्यक्रम उन्होंने बतौर मुख्य अतिथि यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में देश व प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा रहा है। इससे पहले उन्होंने मंदिर परिसर में यज्ञ में आहुतियां डालकर पूजा अर्चना की।
उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी का इतिहास बहुत ही पुराना है, इसलिए हमें इस बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। सरस्वती नदी यमुनानगर के आदिबद्री से शुरू होकर अरब सागर में पहुंचती है। इसके बीच में लगभग 633 धार्मिक स्थल आते हैं और हरियाणा की बात करें तो 444 धार्मिक स्थान सरस्वती नदी के तट पर है। लुप्त हुई सरस्वती नदी को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2015 में सरकार ने हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड का गठन किया।
उन्होंने कहा कि गंगा यमुना और सरस्वती का संगम प्रयागराज में होता है जहां महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। यदि हमें अपनी नदियों को बचाना है तो हम सबको मिलकर कार्य करना होगा। पोलड़ गांव के आसपास लगभग दो करोड़ 72 लाख रुपये की धनराशि से स्टोन पिचिंग का कार्य भी किया जाएगा।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सीईओ कुमार सुप्रवीण ने कहा कि लुप्त होती सरस्वती नदी को दोबारा से पुनर्जीवित करने के लिए अनेक कार्य किये जा रहे हैं। हरियाणा सरकार द्वारा आदि बद्री में एक डैम बनाया जाएगा, जिसकी लागत लगभग 38 करोड़ होगी। इसके नीचे सरस्वती बैराज पर लगभग 250 एकड़ में विशाल जलाशय भी तैयार किया जाएगा। हरियाणा में यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, फतेहाबाद व सिरसा जिले में से सरस्वती नदी निकलती है। छह जगहों पर अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव के अंतर्गत कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहे हैं।
इस मौके पर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सीईओ कुमार सुप्रवीण, शैली मुंजाल, जगतार माजरी, रवि मौर्य, संजीव मित्तल, जोगा सिंह, बलवंत सिंह, हिमांशु शर्मा, सत्यवान, रामकुमार शर्मा, नरेश मुंजाल, जंगीर सिंह, बंसी लाल, सुभाष भट्ट, संजय सैनी, गुरविंदर काका, गगन सरपंच, श्यामलाल, हरमेल सिंह, पवन आदि मौजूद रहे।
लुप्त हो रही नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से सरस्वती नदी पर किया जा रहा घाटों का निर्माण
पोलड़ गांव के प्राचीन संस्कृत मंदिर पर मनाया गया सरस्वती महोत्सव
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