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ई-मैपिंग, एसएमएस व पेमेंट ने बढ़ाई आढ़तियों और किसानों की चिंता

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कैथल। सरकार द्वारा ई-ट्रेडिंग प्रणाली शुरू किए जाने से किसान व आढ़ती असमंजस मेें हैं। सप्ताह भर से खरीद की गई गेहूं की सरकार ने अभी तक पेमेंट नहीं की है। वहीं मेरी फसल, मेरा ब्यौरा पोर्टल पर भी किसान उलझन की स्थिति में हैं। आढ़तियों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू की गई इस प्रणाली से किसान और आढ़ती दोनों को समस्या है। गेहूं के कट्टे की मंडी में ही पड़े हैं, जिसका न तो सही से उठान हो रहा है और न ही समय पर खरीद हो रही है। मौसम दिनोंदिन बदल रहा है, जिससे आढ़ती और किसानों की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है।
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ई-मैपिंग ने बिगाड़ा शेड्यूल
आढ़ती सुभाष जैन ने बताया कि सरकार ने जो ई-मैपिंग प्रणाली शुरू की है उसने सारा का पूरा शेड्यूल बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि न ही गेट पास कट रहे हैं और न ही ढेरियां लिखी जा रही हैं। वहीं लोडिंग की भी समस्या है। उन्होंने कहा कि ई-मैपिंग न किसान के हक में है और न ही आढ़ती के हक में है।
नहीं हो रहा उठान
आढ़ती प्रवेश तंवर का कहना है कि सबसे पहली समस्या किसान के पास मैसेज नहीं जाता। वो इसलिए नहीं जाता क्यों कि जो ई-मैपिंग का शेड्यूल में है उसके अनुसार ही जाता है। उधर किसान आढ़ती के पास गेहूं की खरीद को लेकर दिन-रात फोन करता है। उन्होंने कहा कि जो माल पहले ही खरीदा गया है। उसका उठान नहीं हो रहा है। बारिश में भीग गया जो सुखाया जा रहा है।
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ई-प्रणाली सबसे बड़ी बीमारी
आढ़ती शमेशर का कहना है कि ई-प्रणाली सबसे बड़ी बीमारी है। उन्होंने कहा कि मेरी फसल, मेरा ब्यौरा पोर्टल भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। किसानों के रिकॉर्ड का भी मिलान नहीं हो रहा है। किसानों के पास एसएमएस नहीं पहुंच पा रहे हैं। आढ़तियों को हर समय पैसों की जरूरत होती है। जिस पर किसान निर्भर रहता है। अभी तक सरकार की तरफ से एक भी पैसा नहीं आया। वहीं आढ़ती धर्मवीर कठवाड़ ने बताया कि एसएमएस और गेट पास की सबसे ज्यादा समस्या है। किसानों द्वारा पोर्टल पर पंजीकरण के बाद भी मेपिंग में भी किसानों की जमीन शो नहीं हो रही।
मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार ने बताया कि सरकार के निर्देशों के अनुसार गेहूं की खरीद हो रही है। किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। किसान धैर्य बनाएं रखें।
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