जाट स्कूल में कोरोना वैक्सीन के ड्राई रन में एक व्यक्ति डीसी की मौजूदगी में बिना लिस्ट में नाम वेरिफाई करवाए वैक्सीन लगवाने पहुंच गया। वैक्सीन प्रक्रिया में इस खामी पर डीसी ने संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई। इसके अलावा भी ड्राई रन में अनेकों खामियां देखने को मिली। जिस पर डीसी ने सवालिया निशान खड़ा कर कहा कि ये तो आपकी ट्रेनिंग है? डीसी ने निरीक्षण के दौरान ड्राई रन में प्राइवेट अस्पतालों के स्टॉफ को शामिल न करने, गेट पर ही वेरिफिकेशन न करने, बेड की बजाए फर्श पर ही गद्दे लगाए जाने व स्टॉफ को ड्यूटी की पूरी जानकारी न होने पर नाराजगी जताई और बोले ये ड्राई रन इसीलिए किया गया है कि खामियों का पता चले और उसे सुधारा जा सके।
डीसी सुजान सिंह वीरवार दोपहर को करीब सवा बारह बजे जाट स्कूल में बनाए गए कोविड वैक्सीन लगाने के ड्राई रन सेंटर में पहुंचे। जहां डिप्टी सिविल सर्जन डा. नीलम कक्कड़ के साथ निरीक्षण शुरू किया। पहले काउंटर पर उस लिस्ट की जांच की, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के उन कर्मचारियों के नाम थे, जिन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए मैसेज भेजा गया था। इसके बाद डीसी वेटिंग रूम में पहुंचे।
प्राइवेट अस्पताल के स्टॉफ को क्यों नहीं बुलाया
वेटिंग रूम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक स्वास्थ्य कर्मचारी का नाम व पता पूछने पर डीसी ने डिप्टी सिविल सर्जन डा. नीलम कक्कड़ से पूछा कि विभाग के सरकारी कर्मचारियों को तो बुला लिया, क्या प्राइवेट अस्पतालों से भी किसी स्टाफ को बुलाया है? इस पर डिप्टी सीएमओ ने कहा कि प्राइवेट को नहीं बुलाया है तो डीसी ने कहा कि जब पहले चरण में सभी स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन लगनी है तो दो-चार प्राइवेट अस्पताल के स्टाफ को भी बुलाया जाना चाहिए था। ताकि उन्हें भी पूरी प्रक्रिया का पता चल सके।
वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर डीसी ने उठाया सवाल
वैक्सीनेशन रूम में कंप्यूटर पर बैठे कर्मचारी से पूछा कि आपका क्या काम रहेगा? इस पर कर्मचारी ने कहा कि वह ऑनलाइन में उस व्यक्ति के नाम की जांच करेगा, जो वैक्सीन लगवाने पहुंचेगा। इस पर डीसी ने डिप्टी सीएमओ को कहा कि क्या यह चेकिंग पहले ही चरण पर नहीं होनी चाहिए? डिप्टी सीएमओ बोलीं कि सर हमें हमें गाइडलाइन आई हैं कि यह मिलान इसी कमरे में होगा। इस पर डीसी ने कहा कि तीन स्टेज पार करने के बाद आप लिस्ट में नाम मिलाओगे ? यदि बाहर पुलिस कर्मचारी की लिस्ट में नाम है और कंप्यूटर में उस व्यक्ति का नाम नहीं मिला तो पूरी प्रक्रिया फेल? डीसी ने फटकार लगाते हुए कहा कि आपको बताया था कि यह ड्राई रन चुनाव की तरह से होगा। लिस्ट तो कहीं से भी आ सकती है? लेकिन वेरिफिकेशन पहली ही स्टेज की बजाए तीन स्टेज पार करने पर हो तो ऐसे किसी अपात्र को ही वैक्सीन लग सकती है। इस पर भी डिप्टी सिविल सर्जन कुछ कहने लगीं तो डीसी बोले-जो कहा जाए, वो समझ नहीं आ रहा आपको?
बिना वेरिफिकेशन के बेड तक पहुंचा स्वास्थ्य कर्मी
डीसी के सामने एक स्वास्थ्य कर्मचारी कंप्यूटर में अपना नाम वेरिफाई करवाए बिना ही वैक्सीन लगवाने बैठ गया। इस पर डीसी ने पूछा कि क्या आपका वेरिफिकेशन हो गया? इस पर वेरिफाई करने वाले कर्मचारी ने कहा कि नहीं सर, यह सीधा वैक्सीन लगने के काउंटर पर पहुंच गया। इस पर डीसी ने उस कर्मचारी से पूछा कि यह बिना वेरिफाई किए आगे कैसे चला गया? डीसी ने डिप्टी सिविल सर्जन से सवालिया लहजे में पूछा-ये तो ट्रेनिंग है आपकी? जिस पर आप बहस कर रहे थे। इसलिए मैंने कहा कि वेरिफिकेशन पहली ही स्टेज पर हो जाए तो इस तरह की खामी नहीं रहेगी।
सही जगह नहीं लगाई वैक्सीन - डीसी के सामने जिस कर्मचारी को वैक्सीन का ट्रायल हुआ, उस व्यक्ति के कंधे से नीचे वैक्सीन लगाने का अभ्यास कर स्टाफ नर्स ने उसे जाने को कह दिया। डीसी ने पूछा कि इंजेक्शन वहीं लगना है क्या जहां लगाया है? तो स्टाफ नर्स ने कहा नहीं सर, थोड़ा ऊपर लगना है। इस पर डीसी ने कहा कि फिर ऊपर लगाओ, इसके बाद स्वास्थ्य कर्मचारी के कंधे पर वैक्सीन लगाने का ट्रायल किया गया। डीसी ने कहा कि वैक्सीन में यह सबसे महत्वपूर्ण है कि सही जगह पर लगे, ताकि उसका असर ठीक हो।
वेटिंग रूम में फर्श पर गद्दा, डीसी बोले-कहां से लाए हो?
अगले कमरे में डीसी ने स्टाफ नर्स से पूछा कि यदि किसी को दवा से कोई दिक्कत हो जाएगी तो आप क्या करोगे? नर्स इंजेक्शन आदि लगाने की जानकारी देने लगी। इस पर डीसी ने कहा कि आपको क्लीयर नहीं है कि ड्यूटी क्या है? आपको केवल डॉक्टर को सूचित करना है। अपना रोल ही करिए। दूसरे के रोल में न शामिल होइए। इसके बाद सुपरवाइजर के तौर पर कार्यरत डॉक्टर ने दवा के साइड इफेक्ट होने की स्थिति में विभाग द्वारा दी गई किट से इंजेक्शन लगाने की जानकारी दी। यहां फर्श पर गद्दे लगे देखकर डीसी ने जमकर फटकार लगाई और पूछा कि ये बेड कहां से लेकर आए? नीचे गद्दा लगा रखा है। यहां बेड होना चाहिए। कम से कम दो बेड हर सेंटर पर होने चाहिए और यदि किसी व्यक्ति को दिक्कत होती है तो उसे सामान्य होने के बाद विभाग घर पहुंचाना भी सुनिश्चित करे।