कलायत। जिला कैथल व जींद की सीमा पर बसे अंतिम गांव शिमला में समस्याओं की भरमार है। हालांकि गांव के लोगों ने लगातार दूसरी बार ग्राम सरपंच व सभी 14 पंच सर्वसम्मति से इस उम्मीद से चुने हैं कि गांव की समस्याओं का निदान हो सके। यह तो समय ही बताएगा की सर्वसम्मति से चुनी गई ग्राम पंचायत लोगों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है। गांव में गंदे पानी की निकासी बिल्कुल भी नहीं है। गांव में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से ठप है। तालाबों के घाट टूटे हैं और गलियों के बीच पुलिया टूटी पड़ी हैं।
गांव में न कोई स्टेडियम है तथा चार साल पहले बने नॉलेज सेंटर को आज तक शुरू नहीं किया जा सका। गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं है। गांव शिमला का इतिहास 219 साल पुराना है। गांव की कुल आबादी 5 हजार की है। गांव में 36 सौ मतदाता हैं। गांव का कुल रकबा 20 हजार बीघे का है। गांव में 12 जातियां व उपजातियां रहती हैं। गांव शिमला का सरपंच पद इस बार अनुसूचित जाती के लिए आरक्षित है।
नई पंचायत से बहुत उम्मीदें
जिले सिंह मोर ने कहा कि गांव के लोगों ने विकास को ध्यान में रखते हुए दूसरी बार सर्वसम्मति से ग्राम पंचायत चुनी है। गांव के गंदे पानी की निकासी भी नहीं है जिसके कारण से गांव के चारों और गंदा पानी खड़ा है। नई ग्राम पंचायत से उम्मीद है कि इस सबसे बड़ी समस्या का प्राथमिकता पर निदान हो।
पीने के पानी का हो प्रबंध
रामकला का कहना है कि गांव में पीने के पानी की भारी समस्या है। पूरे गांव में तो पानी की आपूर्ति होती नहीं। जितने क्षेत्र में होती है वहां भी जर्जर पाइपों की वजह से सरकारी नलों में गंदा पानी आता है। इसके अलावा गांव की गलियों में बनी लगभग सभी पुलिया टूटी हैं जिसके कारण से लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
तालाबों के टूटे घाट बने
बीरभान ने कहा कि गांव के सभी तालाबों के घाट टूटे हुए हैं। जिसके कारण से ग्रामीणों व पशुओं को भारी दिक्कत आ रही है। पिछली ग्राम पंचायत भी इन्हें नहीं बनवा सकी। इस पंचायत से उम्मीद है कि इस समस्या से छुटकारा दिलवाए।
खेल स्टेडियम की है दरकार
राकेश मोर ने कहा कि गांव में खेल स्टेडियम नहीं है। बच्चों को अपनी खेल प्रतिभा निखारने का अवसर ही नहीं मिल रहा। गांव में सामलात जमीन बहुत पड़ी है जिसे गांव स्टेडियम के लिए देने को तैयार है। नई ग्राम पंचायत से युवाओं को उम्मीद रहेगी कि इस प्लान में उन्हें खेल स्टेडियम मिल जाए।
टूटी सडक़ का हो निर्माण
शमशेर सिंह ने कहा कि गांव में नॉलेज सेंटर चार साल पहले बन कर तैयार हो चुका है पर आज तक भी उसे शुरू नहीं किया जा सका। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को ध्यान में रख कर बनाया गया नॉलेज सेंटर नशेबाजों को अड्डा बन कर रह गया। इसके अलावा ग्राम पंचायत से उम्मीद है कि गांव शिमला से मटोर को जाने वाला मार्ग पूरी तरह से टूट गया। अधिकांश गांव के लोगों के खेत इसी मार्ग पर पड़ते हैं। इस टूटे मार्ग पर चल कर बैल भी घायल व लंगडे हो गए। पंचायत से उम्मीद है कि इस मार्ग को सही बनवाए।
लोगों की राय से दूर करेंगे हर समस्या
नवनिर्वाचित सरपंच रामचंद्र वाल्मीकि ने कहा कि गांव ने उन पर भरोसा जताते हुए जो जिम्मेवारी देने का निर्णय लिया है वे उस पर हर हाल में खरा उतरेंगे। इस समय गांव में पीने के पानी की व्यवस्था, भाखड़ा जल परियोजना को पूरा करवाना, गांव में पीएचसी बनवाना, गांव में खेल स्टेडियम का निर्माण करवाना, गांव में पार्क के अलावा गांव को हरित गांव बनाना व टूटी पुलियों का निर्माण प्रमुख लक्ष्य रहेगा। इन कार्यों को पूरा करवाने के लिए लगातार सरकार व प्रशासन से संपर्क किया जाएगा।