संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। श्री श्री 1008 नागा बाबा की तपस्थली डेरा नागा बाबा योग आश्रम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन एक अद्भुत और दिव्य आशीर्वाद से भरपूर कार्यक्रम हुआ, जिसमें भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का अत्यंत सुंदर और गहन रूप से वर्णन किया गया।
कथा में मुख्य रूप से गजराज की कथा, गोपी गीत, भ्रमर गीत, वेणु वादन, गोवर्धन लीला और भगवान इंद्र का अभिमान चूर-चूर करने जैसी दिव्य घटनाओं का निरूपण किया गया।
कथा के प्रारंभ में आचार्य गिरधारी भैय्या ने गजराज की कथा का वर्णन किया, जो भगवान श्री कृष्ण के बालपन की नटखट लीलाओं को दर्शाती है।
इसके बाद गोपी गीत और भ्रमर गीत का सुंदर गायन हुआ, जिसने श्रद्धालुओं को कृष्ण भक्ति के गहरे अहसास से जोड़ दिया। गोपी गीत में भगवान श्रीकृष्ण के साथ गोपियों के असीम प्रेम और भावनाओं का गीतात्मक रूप प्रस्तुत किया गया, वहीं भ्रमर गीत में भगवान कृष्ण के संगीत और उनके मधुर वेणु वादन का चित्रण हुआ।
कथा के सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक हिस्से में गोवर्धन लीला का वर्णन हुआ। यह लीला भगवान श्री कृष्ण की अद्वितीय शक्ति और उनके अपने भक्तों के प्रति अगाध प्रेम को दर्शाती है।
आचार्य गिरधारी भैय्या ने बताया कि किस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाया और सात दिनों तक उसे बृजवासियों के ऊपर बनाए रखा। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण ने इंद्रदेव के अभिमान को चूर-चूर किया और अपने भक्तों की रक्षा की। भगवान श्री कृष्ण के गौचरण लीला के बारे में भी आचार्य गिरधारी भैय्या ने भक्तिमय भजनों के माध्यम से दर्शाया।
उन्होंने बताया कि कैसे भगवान श्री कृष्ण ने बृजवासियों को अपने गौचरणों से आशीर्वाद दिया और अपनी दिव्यता को प्रकट किया। इस दौरान भजनों ने दर्शकों को कृष्ण के प्रति अनंत प्रेम में डुबो दिया। मुख्य यजमान के रूप में दर्शन कुमार और कमलेश का योगदान सराहनीय था।
इस अवसर पर कृष्ण, विजय, डॉक्टर बृज मोहन सिंगला, मास्टर रामनाथ चुटानी, हरीश चुटानी, कृष्ण कुमार गर्ग, महेंद्र, सुरेंद्र गोयल, रामचंद्र, सूरजभान और राजकुमार सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।