संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। सीवन क्षेत्र के समर्पित योग शिक्षक धूप सिंह पिछले 16 वर्षों से निरंतर योग साधना में रत हैं और स्वामी रामदेव के योग-दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने में लगे हैं। उनकी दिनचर्या योग से शुरू होती है और योग पर ही समाप्त होती है। यह सिर्फ अभ्यास नहीं, बल्कि उनका जीवन-धर्म बन चुका है।
धूप सिंह न केवल स्वयं योग करते हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर योग, प्राणायाम और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता
फैलाने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने अब तक करीब 45 गांवों में योग शिविरों का आयोजन किया है और करनाल, कैथल व हिसार जैसे जिलों में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
उनका उद्देश्य स्पष्ट है- हर उस दरवाजे तक योग पहुंचाना जहां कोई रोगी है, जहां कोई निराश है।
अस्पतालों से निराश, योग से आश्वस्त ः धूप सिंह बताते हैं- मेरी कक्षा में ऐसे कई लोग आए हैं जो पीजीआई चंडीगढ़, रोहतक या अपोलो जैसे बड़े
अस्पतालों से निराश लौटे थे। आधुनिक चिकित्सा ने जहाँ उन्हें जवाब दे दिया, वहीं योग, प्राणायाम और आयुर्वेद ने उन्हें नया जीवन दिया।
उनका अनुभव कहता है कि शरीर के रोगों के साथ-साथ मन के भय और असहायता को भी योग दूर करता है। उन्होंने कई असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों को राहत दिलाई है।
समाज परिवर्तन की राह पर एक साधक ः आज जब भारत से लेकर विश्व तक योग दिवस पर चर्चा होती है, तो धूप सिंह जैसे समर्पित साधक प्रमाण हैं कि योग सिर्फ व्यायाम नहीं, संस्कार है, संस्कृति है और सेवा का माध्यम भी है। उनका जीवन उन हजारों योग शिक्षकों के लिए प्रेरणा है जो तन-मन से भारत की प्राचीन परंपरा को आधुनिक समाज में पुनर्स्थापित कर रहे हैं।
निःस्वार्थ सेवा का संकल्प
धूप सिंह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के घर जाकर निःशुल्क योग-थेरेपी और आयुर्वेदिक सलाह भी देते हैं। वे लोगों को घरेलू, सस्ती और प्रभावी आयुर्वेदिक उपचारों से परिचित कराते हैं ताकि हर व्यक्ति स्वास्थ्य की दिशा में आत्मनिर्भर बन सके।
उन्होंने स्वामी रामदेव के साथ कई राज्यों में योग शिविरों में भाग लिया है और उनके पास संबंधित प्रमाणपत्र भी हैं। वे कहते हैं कि स्वामी रामदेव की प्रेरणा से ही मैंने योग को जीवन का लक्ष्य बना लिया। अब यह मेरी साधना है, सेवा है और आत्मिक तृप्ति का माध्यम है।