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Kaithal News: पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु

Mon, 14 Jul 2025 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। सावन माह के पहले सोमवार को शहर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह पांच बजे से ही मंदिरों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु जुटने लगे। पूरे शहर में भक्ति और आस्था का माहौल रहा। मंदिरों में रुद्राभिषेक, भस्म आरती और शिव भजनों के साथ शिवभक्तों ने भोलेनाथ का पूजन किया।

शहर के प्रमुख शिव मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल, दूध, दही और पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक किया और मनोकामनाएं मांगी। कांवड़िए भी हरिद्वार से गंगाजल लेकर 23 जुलाई को शिवरात्रि के अवसर पर जलाभिषेक करेंगे।
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शिव के जयघोष से गूंजे अन्य मंदिर : शहर के ढांड रोड स्थित शिव शक्ति धाम, प्रताप गेट के अंबकेश्वर मंदिर, और हनुमान वाटिका के शिव मंदिर सहित अन्य स्थलों पर भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हनुमान वाटिका के पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि सोमवार को किया गया महारुद्राभिषेक विशेष फलदायक होता है। अभिषेक के पश्चात जल को घर में छिड़कने व आचमन करने से रोग और बाधाएं दूर होती हैं।

सीवन: श्रद्धा की बयार : सीवन कस्बे में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। स्वर्गद्वार शिव मंदिर में अलसुबह से ही भक्त कतारों में लग गए। पुजारी ओमप्रकाश ने बताया कि श्रावण के सोमवार शिवभक्ति के लिए सर्वोत्तम दिन होते हैं। मंदिर परिसर “ॐ नमः शिवाय” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा।

सुबह से भस्म आरती, रुद्राभिषेक और शिव भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। श्रद्धालु संगीत बंसल, प्रवेश, सुमेश बंसल काका, रामपाल बंसल, अशोक गोयल व मोहित गोयल सहित अनेक लोग दर्शन के लिए पहुंचे।

विशेष उत्साह, विशेष श्रद्धा

श्रद्धालु श्याम सुंदर गौड़ ने कहा कि सावन में भगवान शिव की पूजा से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। महिला श्रद्धालु रवीना, सुनीता और मीनाक्षी ने बताया कि वे हर सोमवार व्रत रखती हैं और पूरे माह शिव की आराधना करती हैं।
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ग्यारह रुद्री मंदिर में भक्तों की विशेष आस्था

महाभारत कालीन श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या देखी गई। पुजारी मुनिंद्र मिश्रा ने बताया कि यह मंदिर ऐतिहासिक और फलदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि सावन में भगवान शिव की पूजा अत्यंत पुण्यकारी होती है, और इसके लिए तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो चुकी थीं।
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