संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक उपभोक्ता को महज छह माह की अवधि का 1.50 लाख रुपये का बिजली बिल थमा दिया गया, जिसके सुधार के लिए वह पिछले छह महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। समाधान के बजाय उसे केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। मामला बिजली निगम कार्यालय में आयोजित उपभोक्ता शिकायत निवारण समिति की बैठक में सामने आया। इसे अगली बैठक तक के लिए लंबित रखा गया।
काकौत निवासी भगवान सिंह ने बताया कि सामान्य घरेलू कनेक्शन है, पर छह माह का बिल 1.50 लाख आया है। मीटर जंप करता है, जिसकी शिकायत उन्होंने पहले भी विभाग को दी थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भगवान सिंह ने बताया कि वे पिछले छह महीनों से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के पास लगातार जा रहे हैं, परंतु हर बार अगली तारीख देकर उन्हें टाल दिया जाता है। अधिक बिल आने के डर से उन्होंने अपना कनेक्शन तक कटवा दिया, फिर भी बिल में संशोधन नहीं किया गया।
मैंने इतनी बिजली की खपत नहीं की है कि 1.50 लाख रुपये का बिल आए। यह बिल पूरी तरह गलत है। मेरा कहना है कि विभाग को पहले मेरे मीटर की सही तरीके से जांच करनी चाहिए थी। बिना जांच और समाधान के ही मुझे बार-बार नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है। मैं चाहता हूं कि पहले मीटर की जांच हो और उसके बाद ही सही बिल जारी किया जाए। -भगवान सिंह, काकौत
मैंने सोलर पैनल योजना के तहत आवेदन किया था। स्थानीय कार्यालय में मुझे पात्र बताया गया था और एसडीओ साहब ने हस्ताक्षर कर इसकी पुष्टि भी की थी। लेकिन बाद में कैथल-करनाल रोड स्थित विभागीय शिविर में मुझे यह कहकर वापस भेज दिया गया कि मेरा परिवार पहचान पत्र पंचकूला कार्यालय से लिंक नहीं है। मैं पिछले डेढ़ महीने से इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहा हूं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिला है। -अर्जन सिंह, गुहला-चीका
सात शिकायतों में से केवल तीन का मौके पर निपटारा
उपभोक्ता शिकायत निवारण समिति की बैठक में कुल सात शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें मीटर रीडिंग में गड़बड़ी, गलत बिलिंग, ट्रांसफार्मर की समस्या और नए कनेक्शन में देरी जैसे मुद्दे शामिल रहे। इसी क्रम में पाडला गांव के सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र का ट्रांसफार्मर पुराना हो चुका है और उस पर अत्यधिक लोड पड़ रहा है। कई बार तार ढीले होने से स्पार्किंग भी होती है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। वे पिछले तीन महीनों से ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। अधिकारियों ने दावा किया कि सात में से तीन शिकायतों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया, जबकि शेष चार मामलों में संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
मैंने संबंधित डिवीजन के अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे अगली बैठक में मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और पूरा रिकॉर्ड लेकर उपस्थित हों। तथ्यों की जांच की जाएगी, ताकि शिकायतकर्ता को उचित और पारदर्शी समाधान दिया जा सके।
-योगराज, अध्यक्ष उपभोक्ता शिकायत निवारण समिति
सुरेंद्र सिंह
सुरेंद्र सिंह
सुरेंद्र सिंह