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पंचायती राज्य प्रशासनिक सेवा संघ का प्रदर्शन

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07-कैथल। लघु सचिवालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए ग्राम सचिव। - फोटो : Kaithal
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कैथल। ग्राम सचिवों ने पंचायती राज्य प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले मंगलवार को प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अन्य सुधारों के साथ मांग की कि उनसे वित्तीय शक्तियां वापस ले ली जाएं ताकि उन पर पड़ने वाले राजनेताओं के दबाव से वे मुक्त हो सकें।
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खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी और ग्राम सचिव सुबह हनुमान वाटिका में एकत्रित हुए। फिर वे सरकार के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे। इस दौरान प्रवक्ता वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि एक साल से हरियाणा में पंचायतें भंग हैं। पंचायतों की वित्तीय शक्तियां खंड स्तर पर बीडीपीओ को दे रखी हैं। जो भी कार्य होते हैं, उसके लिए जेई व एसडीओ तैयारी करते हैं।
वे मंत्री, विधायक का फोन करवा देते हैं कि यह भुगतान कर दीजिए जबकि काम में लागत की जिम्मेदारी जेई की है। जेई के कहने पर वे काम कर देते हैं। बाद में जांच होने पर सचिव व बीडीपीओ को दोषी करार देते हैं। इसमें तकनीकी शाखा की जिम्मेदारी तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में सिरसा व पलवल में 23 ग्राम सचिव व चार बीपीडीओ को निलंबित किया गया है जबकि उन्होंने तकनीकी स्टॉफ व वहां के स्थानीय विधायक के कहने पर काम किया। इसकी जिम्मेदारी तकनीकी शाखा की है। इससे ग्राम सचिवों की छवि खराब हो रही है।
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बीडीपीओ सुरेंद्र कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायतों को भंग हुए एक साल से अधिक समय बीत गया है। अब काम करवाने की शक्ति बीडीपीओ और ग्राम सचिव पर आ गई है। उनके तकनीकी विभाग के रूप में जेई और एसडीओ काम करते हैं। उसके बावजूद बीडीपीओ और ग्राम सचिव पर गलत तरीके से राशि खर्च करने का आरोप लगाया जाता है। इसलिए उन्हें दी गई वित्तीय शक्ति को तुरंत प्रभाव से रद किया जाए।
प्रदर्शन के बाद लघु सचिवालय में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। प्रदर्शन की अध्यक्षता ग्राम सचिव विकास शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पंचायतों में इस समय ग्राम सचिवों के पास वित्तीय शक्तियां हैं। जिसे वे छोड़ना चाहते हैं। उनकी मांग है कि उनसे वित्तीय शक्तियां वापस ली जाएं।
सीएम को पहले ही दी है जानकारी
उधर, सर छोटू राम विचार मंच के जिला प्रधान सुरेंद्र ढुल ने कहा कि ग्राम सचिवों की ओर से इंगित की गई पंचायती राज विभाग में कुछ जनप्रतिनिधियों की विकास कार्यों में संदिग्ध भूमिका पूर्ण रूप से सच्ची है। ढुल ने कहा कि उन्होंने इस मामले को स्वयं मनोहर लाल तक पहुंचाया था। जिस पर मुख्यमंत्री ने राज्य चौकसी ब्यूरो के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर को यह मामला भेजने के निर्देश जारी किए थे।
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