फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: किसानों की फसल डालने के लिए जगह उपलब्ध कराने की मांग

विज्ञापन
विज्ञापन
पाई। पाई अनाज मंडी में किसानों की गेहूं की फसल डालने के लिए जगह न होने के चलते आढ़तियों को मजबूरन किराये पर जगह लेनी पड़ती है, जबकि फसल से होने वाली मार्केट फीस के रूप में आमदनी मार्केट कमेटी ले जाती है। आढ़तियों की मांग है कि किसानों की फसल के लिये सरकार उनको जगह उपलब्ध कराए। मंडी के पूर्व प्रधान रणधीर सिंह फौजी ने बताया कि गेहूं का सीजन आने में लगभग सवा महीना रह गया है, पर सरकार के द्वारा किसानों की गेहूं की फसल डालने के लिए मंडी में पर्याप्त जगह नही है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि मंडी में जगह न होने के कारण आढ़तियों को अपने किसानों की फसल डलवाने के लिए किराये पर जमीन लेनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि किराये पर ली गई इस जमीन का किराया आढ़ती को अपनी आढ़त में से देना पड़ता है। इस जमीन पर ड़ाली गई फसल पर मार्केट फीस के रूप में चार प्रतिशत आमदन मार्केट कमेटी को होती है। उन्होंने कहा कि जब आमदन मार्केट कमेटी लेती है तो किसानों की फसल के लिये जगह उपलब्ध करवाना भी मार्केट कमेटी का काम है। उन्होंने मार्केट कमेटी व सरकार से मांग की है कि आढ़तियों को सीजन में किसानों की गेहूं की फसल डालने के लिए जगह उपलब्ध करवाएं या फिर जो जगह आढ़ती लेते है उसका किराया कमेटी द्वारा दिया जाये।

जगह का किराया देकर आढ़ती के पास नही बचती आढ़त : मंडी प्रधान

इस बारे में जब मंडी प्रधान सत्यवान ढुल से जाना गया तो उन्होंने मंडी की जगह कम बताते हुए बताया कि आढ़ती किराये पर जमीन लेते है। गेहूं की फसल से मिलने वाली आढ़त तो किराये के रूप में चली जाती है, ऐसे में मार्केट कमेटी को जगह उपलब्ध करवानी चाहिए।
विज्ञापन



जगह ढूंढी जा रही है : सचिव

इस बारे में मार्केट कमेटी सचिव जोगिन्द्र सिंह पेसिया ने बताया कि मंडी के पास कोई पक्की जगह नही है, जहां किसानों की फसल डाली जा सके, फिर भी जगह देखने के प्रयास चलाए हुए है। उधर इस बारे में जब मार्केट कमेटी चेयरमैन कृष्ण पिलनी से जानना चाहा तो उसने फोन उठाने की जहमत नही उठाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें