ग्यारह रूद्री मंदिर में पाम के पत्ते और फूलों से सजाए गए शिवलिंग। संवाद
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कैथल। अधिक मास की शिवरात्रि के अवसर पर शनिवार को कैथल स्थित प्राचीन 11 रुद्री मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन सुबह से ही लगा रहा। इस अवसर पर शिवलिंग को रंग-बिरंगे फूलों, पाम के पत्तों और आकर्षक सजावट से भव्य रूप दिया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और रुद्राभिषेक करवाकर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में पंडित मुनींदर मिश्रा के सान्निध्य में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। सुबह 7 बजे से ही श्रद्धालुओं का मंदिर में आना शुरू हो गया था। पूरे मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
पंडित मुनींदर मिश्रा ने बताया कि अधिक मास की शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह संयोग लगभग तीन वर्ष में एक बार बनता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से कराया गया एक रुद्राभिषेक 11 रुद्राभिषेक के बराबर पुण्य फल प्रदान करता है। इसी कारण शिव भक्त इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं।
उन्होंने बताया कि रुद्राभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, फल, पुष्प, वस्त्र अर्पित किए। कई श्रद्धालुओं ने अन्नदान, फल वितरण और जरूरतमंदों को दान देकर भी पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बनी रही और श्रद्धालु शिव भक्ति में लीन नजर आए।
यह है पौराणिक मान्यता
पंडित मुनींदर मिश्रा ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार विष्णु भक्त प्रहलाद के पिता हिरण्य कश्यप ने वरदान मांगा था कि वह किसी भी महीने में न मरे। तब इस राक्षक का वध करने के लिए अधिक मास यानी 13वां महीना बनाया गया था और इस प्रकार भगवान नरसिंह ने इसी अधिक या मल मास में उसका वध किया।
ग्यारह रूद्री मंदिर में पाम के पत्ते और फूलों से सजाए गए शिवलिंग। संवाद- फोटो : 1