संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। पूंडरी में बुधवार को ब्लॉक समिति अध्यक्ष महेंद्रो देवी की कुर्सी बचाने व गंवाने की रस्सा कसी का एक तरह से मुकाबला होने वाला है। हालांकि केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के चलते ओर विधायक सतपाल जांबा की प्रतिष्ठा दांव पर लगने से अध्यक्ष की कुर्सी बचने के आसार कम ही नज़र आ रहे हैं। हालांकि सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष की कुर्सी बच भी सकती है।
गौरतलब है कि बुधवार को अध्यक्ष महिंद्रो देवी व उपाध्यक्ष सोनू पाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी। दोनों ही कांग्रेस खेमे के बताए जा रहे हैं। इसलिए इनकी भी कुर्सी बच पाना मुश्किल लगा रहा है, क्योंकि 26 में से 18 सदस्यों से अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए अपने शपथ पत्र दिए हैं। ऐसे में अब मौजूदा अध्यक्ष महेंद्रो देवी के लिए कुर्सी बचाना आसान नहीं होगा।
वर्ष 2022 में पूर्व विधायक के नेतृत्व में चुनी गई थीं अध्यक्ष ः महेंद्रो देवी 2022 में निर्दलीय विधायक रणधीर गोलन के समर्थन से अध्यक्ष चुनी गई थीं। विधानसभा चुनाव में इनके पति अशोक कुमार ने कांग्रेस का समर्थन किया था, लेकिन सरकार भाजपा की बन गई। ऐसे में भाजपा समर्थित कई पार्षद इनसे खफा हो गए।
पूर्व विधायक रणधीर गोलन समर्थित हैं अध्यक्ष ः बेशक अध्यक्ष पूर्व में भाजपा समर्थित निर्दलीय पूर्व विधायक रणधीर सिंह गोलन समर्थित होने के साथ-साथ रोड समाज से भी संबंध रखती हैं, लेकिन भाजपा विधायक सतपाल जांबा अध्यक्ष की कुर्सी पर हर हाल में अपने समर्थित को बिठाना चाहेंगे।
चुनाव से पहले के कांग्रेस की सरकार के सर्वे पड़े भारी ः पूंडरी ब्लॉक समिति अध्यक्ष चुनाव से पूर्व भाजपा समर्थित ही रही लेकिन एग्जिट पोल में कांग्रेस की बहुमत से सरकार बनने की सोच चेयरपर्सन प्रतिनिधि कांग्रेस प्रत्याशी सुल्तान जडौला के मंच पर समर्थन देने का ऐलान कर आए। नतीजे रहे एग्जिट पोल के विपरीत ओर सरकार बनी भाजपा की। बस यही निर्णय उनकी कुर्सी पर खतरा बन मंडरा रहा है लेकिन अभी कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा। दरअसल, अध्यक्ष को सिर्फ़ 9 पार्षदों का समर्थन चाहिए और दूसरे पक्ष को 16 से अधिक।
कयास : अध्यक्ष रोड समाज से या दूसरे समाज से
पूंडरी हलका रोड बाहुल्य हलका होने के कारण ही कस्बे में रोड समाज की ही अध्यक्ष बनने के कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर रोड समाज से ही अध्यक्ष बनानी है तो फिर महिंद्राे ही क्यों नहीं। पूंडरी का बुद्धिजीवी वर्ग अध्यक्ष ब्राह्मण समाज से बनाए जाने की कही जा रही है। लोगों की मानें तो ब्राह्मण या राजपूत समाज को ब्लॉक समिति में अहम देने को विधायक सतपाल के एक तीर से दो निशाने साधे जाने की सुनी जा रही है। लेकिन अगर रोज समाज की अध्यक्ष को हटा कर दूसरे समाज को महत्त्व देने रोड समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग विधायक से नाराज भी हो सकता है। खैर जो भी होगा उसका परिणाम तो बाद में ही आएगा। ब्राह्मण व राजपूत समाज द्वारा विधानसभा चुनाव में सतपाल जांबा को भारी मतदान करने उनको इनाम विधायक की ओर से मिल सकता है।
जिला परिषद कैथल, सीवन, गुहला के बाद अब पूंडरी का नंबर
नरेंद्र राणा
कैथल। जिला परिषद कैथल के अध्यक्ष की कुर्सी के लिए लंबी खींचतान के बाद भाजपा समर्थित कर्मबीर कौल सर्वसम्मति से नए अध्यक्ष बने। इसके बाद सीवन और गुहला ब्लॉक समिति के अध्यक्ष को कुर्सी चली गई। अब पूंडरी ब्लॉक समिति के अध्यक्ष की बारी है। सारे राजनीतिक समीकरण फिट हो चुके हैं। बस देखना बाकी है कि बुधवार को अंतिम परिणाम क्या होगा।
विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव के समय पार्टी बदलने का खामियाजा भुगतना पड़ा। इन तीनों ही अध्यक्षों को पाला बदलने के बाद कुर्सी से हटकर खामियाजा भुगतना पड़ा है।
जिला परिषद और सीवन पंचायत समिति के बाद गुहला ब्लॉक समिति अध्यक्ष को पार्टी बदलने के चलते कुर्सी गंवानी पड़ी। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव से पहले जजपा समर्थित थे। वहीं, सीवन और गुहला ब्लाक समिति अध्यक्ष भाजपा समर्थित थे। विधानसभा चुनाव के दौरान जिप अध्यक्ष सहित इन दोनों अध्यक्षों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
अब पूंडरी में भी बदलाव की लहर चल रही है। पूंडरी विधानसभा चुनाव में ही भाजपा ने खाता खोलकर पार्टी को जीत का तोहफा दिया था। विधायक सतपाल जांबा इस समय राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और यदि यहां कुर्सी बदली तो उनका कद और बढ़ जाएगा। संवाद