शहर भर में बेटियां विद्या वाहिनी बस सेवा के न चलने से परेशान हैं। छात्राओं का कहना है कि विद्या वाहिनी की मदद से स्कूल-कॉलेजों में समय पर पहुंच जाती थीं और वहां से घरों तक भी जल्दी पहुंच जाती थीं। अब उन्हें ग्यारह बजे तक शिक्षण संस्थानों में पहुंचना पड़ता है। छात्राओं ने डीसी से मांग की है कि सर...जल्दी से विद्या वाहिनी चलवा दीजिए। ताकि हमें सड़कों पर पैदल ना भटकना पड़े।
विदित रहे कि दो साल पहले तत्काल डीसी डा. प्रियंका सोनी द्वारा विद्यावाहिनी बस सेवा शुरू करवाई गई थी। अब इन बसों के संचालन न होने से छात्राओं को बहुत सारी परेशानी को झेलना पड़ रहा है। विद्यावाहिनी बस छात्राओं को सुबह व छुट्टी के समय शिक्षण संस्थानों से बस अड्डा व बस अड्डा से शिक्षण संस्थानों तक लेकर जाती थी। दो महीनों से स्कूल, कॉलेज व आईटीआई जैसे कई शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को आवागमन शुरू हो गया है। ऐसे में बेटियों को विद्यावाहिनी बसों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने बसों को चलाए जाने की मांग की।
सुबह कालेज जाने की चिंता तो वापस घर पहुंचने की चिंता- गांव सोंगल निवासी आरकेएसडी कालेज की छात्रा कोमल ने कहा कि सुबह कालेज के लिए घर से निकलती हैं तो उन्हें यह चिंता रहती है कि आखिर कॉलेज और वहां से घर कब पहुंचेंगी? बस अड्डे पर आने के बाद ऑटो का इंतजार करना पड़ता है कि यह कब भरेगा और कब चलेगा। यदि पैदल कॉलेज तक आएं तो भी काफी देर लगती हे।
सुबह सात बजे चली, पहुंची ग्यारह बजे- गांव साकरा निवासी छात्रा रूबी का कहना है वे शहर के राजकीय पीजी कालेज में पड़ती है। सुबह सात बजे घर से चली। ग्यारह बजे कालेज पहुंचीं। किसी तरह बस अड्डे पर पहुंचती हैं। यहां से ऑटो या फिर पैदल ही कॉलेज तक आना-जाना पड़ता है। कई बार वापिसी में बस छूट जाती है। कालेज में स्पेशल आटो भी नहीं मिला।
बड़ी मुश्किल से कालेज आती है, वापस जाने की भी चिंता- गांव डुलियानी निवासी आईजी कालेज की छात्रा कविता ने कहा कि कालेज पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सुबह घर आ जाते है लेकिन वापस जाने की रहती है चिंता। मंगलवार कोे सुबह आठ बजे गावं से चली दस बजे कालेज पहुंची। क्योंकि बस अड्डे से आगे या तो पैदल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर ऑटो लेकर।
शाम को पहुंचती हूं घर, अभिभावक करते है इंतजार
गांव फिरोजपुर निवासी छात्रा सोनिया ने कहा कि वे आईटीआई में पड़ती है। सुबह पहले गांव से प्राइवेट वाहनों में शहर पहुंचती है। बस स्टैंड पर ऑटो के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा अगर विद्यावाहिनी बसें चल जाए तो समय से घर पहुंच पाएंगी। पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।
रैडक्रॉस सचिव रामजी लाल का कहना है कि इस बारे में डीसी से अनुमति ली जाएगी। उन्हें इस बारे में जानकारी मिली थी कि कोई कंपनी इसे स्पॉंसर कर रही थी। दोबारा से बात की जाएगी कि शीघ्र ही इन बसों को फिर से शुरू किया जाए। प्रयास किया जाएगा कि बेटियों को यह सेवा शीघ्र मिले।