संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। नगर की बड़ी चौपाल पर स्वामी विवेकानंद विशेष शिक्षण संस्थान के सौजन्य से किए जा रहे हरियाणवीं कलाकारों की ओर से सांग हीर-रांझा देखने को भीड़ उमड़ रही है। जिसको देख कर लोग अपने क्षेत्र व हरियाणा प्रदेश की पारंपरिक याद ताजा कर रहे हैं। हरियाणवीं कला प्रेमी मांगे राम शर्मा ने बताया कि कलायत के हरियाणवीं संस्कृति के कलाकारों का लोहा उत्तर भारत सहित सरहद पार भी माना गया है।
उन्होंने बताया कि पहले जमाने में मोबाइल, टेलीविजन, सिनेमा व रेडियो मनोरंजन के साधन कहां होते थे। उस समय में तो सांग ही मनोरंजन व अपना इतिहास बताने का साधन होता था। आज कल तो इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में किसी के समय ही कहां है कि अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए और जिसमें हमारा इतिहास का भी पता लगता है। ऐसे-ऐसे अवसरों को देखना अवश्य चाहिए। जिससे हमारी संस्कृति को जिंदा रखा जा सके।
उन्होंने बताया कि कलायत नगर में चेत राम, ज्वाला प्रसाद, जय सिंह राणा व सरदारी बेगम सहित कई अन्य समय-समय पर अनेक कवि और कलाकारों ने इस पावन धरा पर जन्म लिया है। जिनकी रचनाओं को आज भी लोग सार्वजनिक मंचों पर गाकर याद करते हैं। उन्होंने कहा कि कला, संस्कृति एवं मनोरंजन के द्वारा ही हर देश व प्रदेश की पहचान देखने को मिलती हैं। ऐसा ही नजारा किसी जमाने में कलायत का होता था। कलायत एक ऐतिहासिक नगर है। यहां पर भगवान श्री कपिल मुनि का मंदिर है। यहां पर ऐतिहासिक मुडाढ 360 गांव का चबूतरा व गोशाला भी स्थापित है। और इसी पावन धरा पर ही अनेकों विख्यात कवि व कलाकारों ने जन्म लिया है।
जिनमें से एक कलाकार मुस्लिम समुदाय से सरदारी बेगम भी हुई है जिसने सांग के माध्यम से अपने देश ही नहीं पाकिस्तान में भी पहली महिला, हरियाणवीं संस्कृति की कला से कलाकार के रूप में पहचान बनाई थी। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली व मुंबई चला गया।